रामलीला में भगवान भगवान और सीता के अलावा कोई तीसरा सबसे प्रमुख किरदार है तो वह हैं महावीर हनुमान जी। बिना हनुमान जी के रामलीला के विषय में सोचा भी नहीं जा सकता।
इसलिए भगवान राम के जन्म के बाद दूसरे अंक में जानिए कैसे हनुमान जी का जन्म हुआ। राम और हनुमान जी के बीच स्वामी और सेवक का नाता था या कुछ भी फिर निकट का संबंध था।
एक मान्यता के अनुसार हनुमान जी भले ही कौशल्या और दशरथ के पुत्र नहीं थे लेकिन राम और हनुमान के बीच भरत, लक्ष्मण और शत्रुध्न के समान भाई का नाता था।
हनुमान चालीसा में लिखा भी है भगवान राम हनुमान जी से कहते हैं 'तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।' यानी हे हनुमान तुम मुझे भरत के ही समान प्रिय हो। राम जी के ऐसा कहने का तात्पर्य रामायण की कथा से ज्ञात होता है।
इस तरह भगवान राम और हनुमान जी का जन्म हुआ
रामायण में एक कथा है कि राजा दशरथ की तीन रानियां थीं लेकिन संतान सुख के अभाव के कारण दशरथ जी दुःखी थे। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से दशरथ जी ने श्रृंग ऋषि को पुत्रेष्टि यज्ञ करने के लिए आमंत्रित किया गया।
यज्ञ के सम्पन्न होने पर अग्निकुंड से दिव्य खीर से भरा हुआ स्वर्ण पात्र हाथ में लिए अग्नि देव प्रकट हुए और दशरथ से बोले, ‘‘देवता आप पर प्रसन्न हैं। यह दिव्य खीर अपनी रानियों को खिला दीजिए। इससे आपको चार दिव्य पुत्रों की प्राप्ति होगी।
राजा दशरथ शीघ्रता से अपने महल में पहुंचे। उन्होंने खीर का आधा भाग महारानी कौशल्या को दे दिया। फिर बचे हुए आधे भाग का आधा भाग रानी सुमित्रा को दिया इसके बाद जो शेष बचा वह कैकयी को दे दिया। सबसे अन्त में प्रसाद मिलने से कैकयी ने क्रोध में भरकर दशरथ को कठोर शब्द कहे।
इस तरह गर्भवती हुई अंजना हुआ हनुमान का जन्म
उसी समय भगवान शंकर की प्रेरणा से एक चील वहाँ आयी और कैकयी की हथेली पर से प्रसाद उठाकर अंजन पर्वत पर तपस्या में लीन अंजनी देवी के हाथ में रख दिया। प्रसाद ग्रहण करने से अंजनी भी राजा दशरथ की तीन रानियों की तरह गर्भवती हुई।
समय आने पर दशरथ के घर राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। दूसरी और अंजनी ने श्री हनुमानजी को जन्म दिया। इस तरह प्रगट हुए संकट और दुःखों को दूर करने वाले राम और हनुमान।
एक ही खीर से राम और हनुमान का जन्म होने से दोनों भाई माने जाते हैं।