ओशो ने धर्म और संन्यास को एक नया रूप दिया और इसे जीवंत बनाया। इन्होंने ईश्वर को पाने के लिए संसार से भागने की बजाय संसार से प्रेम करना सिखाया। ओशो का मानना है कि हंसी भी एक प्रकार से ध्यान का स्वरूप है इसलिए जीवन को हंसते-हंसते बीताना चाहिए। ओशो कहते हैं ‘जब तुम वास्तव में हंसते हो तो, उन थोड़े से क्षणों के लिए तुम एक गहन ध्यानपूर्ण अवस्था में होते हो। यदि तुम हंसी से आविष्ट और आच्छादित हो जाओ तो सोच-विचार रुक जाता है और निर्विचार की दशा के लिए हंसना एक सुंदर भूमिका बन जाती है।’’
इसी सुंदर भूमिका और ध्यान की अवस्था के लिए, ओशो वर्ल्ड पिछले बारह वर्षों से नव वर्ष की शुरूआत हंसी और ठहाकों से करता आ रहा है। ओशो के अनुयायी और इनके सिद्धांतों को मानने वाले नई दिल्ली स्थिति ओशो वर्ल्ड गैलेरिया में आकर हास्य दिवस पर हास्य कवियों के साथ मिलकर नव वर्ष का जश्न मनाते हैं।
अपनी परंपराओं के अनुसार ओशो वर्ल्ड इस वर्ष भी नव वर्ष का स्वागत हास्य दिवस के रूप में करेगा। लेकिन 16 दिसम्बर को दिल्ली में हुए दुष्कर्म पर ओशो वर्ल्ड दुःखी है। दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ओशो वर्ल्ड इस वर्ष हस्य दिवस के दिन को सामन्य रूप से मनायेगा। इस वर्ष हास्य कवियों को इस समारोह में नहीं बुलाया गया है। ओशो वर्ल्ड में इस साल नववर्ष का स्वागत ध्यान और योग से किया जाएगा।