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नहीं जानते होंगे कि शराब पीने के बाद होश क्यों नहीं रहता

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आपका मन और आपका शरीर अभी नहीं है। अभी आपका मन और आपका शरीर एक है। अभी जल्दी मत करें। अभी आपका मन आपके शरीर का ही दूसरा छोर है। वह शरीर से ही संचालित हो रहा है। शरीर ही उसको अभी गति दे रहा है। इसलिए उचित है कि कीर्तन में अभी शरीर को भी डूबने दें, तो ही आपका मन डूब पाएगा।
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और जिस दिन आप मन ही मन में डुबाने में सफल हो जाएंगे, मुझसे पूछने की कोई जरूरत नहीं रहेगी। आपको खुद ही पता चल जाएगा कि शरीर को बीच में लाने की कोई जरूरत नहीं, मन में ही हो जाता है। तो आप मन में कर लेना। लेकिन जब तक यह नहीं हो सकता, तब तक शरीर से ही शुरू करें।

आप शरीर में जी रहे हैं, इसलिए आपकी सब यात्रा शरीर से ही शुरू होगी। और यह जो धोखा देगा अपने को कि शरीर का क्या करना है, वह असल में धोखा दे रहा है। वह धोखा यह दे रहा है कि वह करना ही नहीं चाहता।
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आदमी वहीं से तो चल सकता है, जहां खड़ा है। जहां आप खड़े नहीं हैं, वहां से चलेंगे कैसे? आपकी मन में स्थिति क्या है? अभी आपको शराब पिला दें, तो शराब तो शरीर में जाती है, मन में तो जाती नहीं। क्या आप समझते हैं, आप होश में बने रहेंगे? आप बेहोश हो जाएंगे। क्यों बेहोश हो गए आप? शराब तो शरीर में जाती है, कोई मन में तो जाती नहीं। कोई आत्मा में तो घुस नहीं जाती शराब।

मन को पहले पता चल जाता है

अभी कोई आपको एक धक्का मार दे जोर से, तो धक्का शरीर तक ही लगता है कि मन तक चला जाता है? मन तक चला जाता है। सच तो यह है कि शरीर को बाद में पता चलता है, मन को पहले पता चल जाता है। तो अभी आपका शरीर और मन बहुत करीब-करीब हैं, अभी दूरी नहीं है उसमें।

मैं निरंतर एक घटना कहता रहा हूं। एक मुसलमान फकीर हुआ, फरीद। एक आदमी उसके पास आया और फरीद से पूछने लगा कि मैंने सुना है कि मंसूर को काट डाला जब, तब भी मंसूर हंसता रहा। यह भरोसा नहीं आता इस बात पर।

और यह भी मैं सुनता हूं कि जीसस को सूली लगा दी गई और उन्होंने कहा कि ये जो सूली लगाने वाले लोग हैं, हे परमात्मा, इन्हें माफ कर देना। यह बात भी जंचती नहीं। कोई मुझ पत्थर मारे, कोई मुझे सूली लगाए, कोई मेरी गर्दन काटे, यह मैं नहीं कर सकता हूं। मैं समझने आया हूं।
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इसलिए होश बेहोश और दर्द का एहसास होता है

फरीद ने उसे उठाकर एक नारियल दे दिया। भक्त फरीद को नारियल चढ़ा देते थे। एक नारियल उठाकर दे दिया और कहा कि तू इसको फोड़ कर ला। एक ही बात का खयाल रखना कि गिरी भीतर की साबूत रहे, टूट न पाए। वह नारियल कच्चा था। वह आदमी मुश्किल में पड़ गया।

उसकी ऊपर की खोल तोड़े, तो भीतर की गिरी टूटे, क्योंकि वह कच्चा नारियल था। बड़ी कोशिश की, लेकिन गिरी टूट गई। लौटकर आया और उसने कहा, माफ करना। मैं गिरी को बचा न पाया, क्योंकि खोल और गिरी बिलकुल जुड़ी हैं। नारियल कच्चा है। आप भी किस तरह की बात करते हैं!

फरीद ने दूसरा नारियल उठाकर दिया। वह सूखा नारियल था। कहा कि अब इसकी फिक्र कर तू। इसको तोड़ ला, गिरी बचा लाना। उसने बजाकर देखा।

उसने कहा कि इसमें कोई अड़चन नहीं है। खोल तोड़ देंगे, गिरी बच जाएगी। क्योंकि खोल ओर गिरी के बीच फासला पैदा हो गया। तो फरीद ने कहा, कि तोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। जीसस नारियल थे सूखे हुए, और तू नारियल है गीला। अभी तेरी गिरी और खोल जुड़े हुए हैं। अभी तू यह फिक्र मत कर। अभी तो तेरी खोल पर जो होगा, वह गिरी तक जाएगा।

अभी शरीर और मन इकट्ठा है आपका। जिन मित्र ने पूछा है, उसके पूछने का अगर कारण यह होता कि उनका शरीर और मन अलग-अलग हो गया है, तो वे पूछते ही नहीं। क्या पूछना है! आपको पता ही होता कि मेरी गिरी अलग है, खोल अलग है।

भीतर मैं अपनी मौज ले रहा हूं, शरीर को कोई पता नहीं चल रहा। पूछने का कारण दूसरा है। शायद बहुत ही कच्चे नारियल हैं। बहुत ज्यादा जुड़े हैं। शायद अभी भीतर गिरी भी नहीं है, पानी ही पानी है।
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