सभ्य समाज की पहचान है वस्त्र। अगर कोई व्यक्ति वस्त्र नहीं पहने और नग्न अवस्था में घूमे तो उसे लोग पागल और असभ्य मानकर उसकी हंसी उड़ाते हैं।
लेकिन इसी सभ्य समाज में एक ऐसा व्यक्ति भी मौजूद है जिसने 43 सालों से वस्त्र नहीं पहना है यानी यह हमेशा नग्न रहता है।
लेकिन लोग इसकी नग्नता की हंसी उड़ाने की बजाय उसके प्रति आदर और श्राद्घा का भाव रखते हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि यह दिगंबर जैनी साधु होंगे तो यह आपकी भूल हो सकती है।
तो आइये जानें इस साधु की नग्न रहने की अजब कहानी।
सर्दी हो या गर्मी कभी वस्त्र नहीं पहना
पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में रहने वाले सुबल बर्मन को दिन के समय चांदमारी गांव के आसपास घूमते हुए और नलसाजी के लिए जाते हुए देखा जा सकता है। कड़ी मेहनत से काम के बाद वह किसी चाय की दुकान पर चाय की चुस्कियां लेते हुए भी दिख जाएंगे।
लेकिन यह इनकी शख्सियत की असली पहचान नहीं है। इनकी पहचान है सर्दी हो या गर्मी यह अपने तन पर कोई भी वस्त्र धारण नहीं करते। यह कोई चंद सालों की बात नहीं है करीब 43 सालों से सुबल बर्मन इसी तरह नग्न अवस्था में रहते हैं।
इसलिए रहते हैं नग्न
नग्न होकर जीवन बिताने के पीछे क्या कारण है इसका जवाब देते हुए सुबल बर्मन कहते हैं कि उन्हें कपड़ों से एलर्जी है। कपड़े पहनने से वह बीमार पड़ जाते हैं और उनका जबड़ा बंद हो जाता है।
बर्मन को इसी अवस्था में देखते बड़ी हुई एक महिला का कहना था कि, "हम सभी उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। उनकी नग्नता को हमने कभी भी अपने लिए असामान्य अथवा समस्या नहीं माना।"
अपने लंबे बालों और नग्नावस्था के कारण वह आपको साधु जैसे दिख सकते हैं। इनकी इस छवि के कारण बर्मन को लोग धर्मात्मा मानते हैं और उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।
हैरान करने वाली बात यह भी है कि इनका अपना भरा पूरा परिवार भी है और इन्हें अपने बच्चों के साथ समय व्यतीत करना अच्छा लगता है और वह उन्हें साइकिल पर बाहर घुमाने भी ले जाते हैं। और ऐसे समय में भी वह नग्न ही रहते हैं।
वर्मन की राजनीति में भी रूचि है और उनका कहना है कि 1995 से वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता हैं।