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जो लगातार कोशिश करता रहता है, वही अपनी मंजिल को हासिल कर पाता है

Wed, 23 May 2018 03:26 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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निकिता की कहानी, जिसे उसकी दादी ने एक कहानी के माध्यम से कभी हार न मानना सिखाया।

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निकिता की दादी मां रोज रात में सोते वक्त निकिता को एक कहानी सुनाया करती थीं। एक दिन उन्होंने प्राजक्ता की कहानी सुनाई और कहा, प्राजक्ता जब महज ग्यारह साल की थी, तब उसके माता-पिता की एक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। प्राजक्ता की देखभाल करने के लिए उसके नानाजी के अलावा परिवार में और कोई नहीं था।

पर उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह प्राजक्ता की हर मांग पूरी कर सकें। फिर भी उन्होंने कभी प्राजक्ता की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। जब तक प्राजक्ता ने बारहवीं पास की, उसके नानाजी भी चल बसे। लेकिन प्राजक्ता ने हार नहीं मानी। उसने लोगों के घरों में छोटे-छोटे काम कर के कुछ पैसे इकट्ठा किए और फिर हाथ से बुने हुए स्वेटर बेचने का काम शुरू किया। प्राजक्ता का बिजनेस चल पड़ा। जल्द ही उसका अपना गोदाम हो गया।
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लेकिन एक दिन उसके गोदाम में आग लग गई और सारे स्वेटर जल गए। उसे अपना बिजनेस बंद करना पड़ा। फिर उसने एक छोटी-सी कंपनी में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू कर दी। वह हर मेहमान से बहुत विनम्रता से पेश आती। उसकी जिंदगी एक बार फिर पटरी पर आ ही रही थी कि उसको विटिलिगो नामक बीमारी हो गई। इस बीमारी से उसके शरीर पर सफेद चित्तियां दिखने लगीं। इसकी वजह से उससे बात करने या उसके पास जाने से लोग कतराने लगे।
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लिहाजा कंपनी ने प्राजक्ता को हटा दिया। प्राजक्ता एक बार फिर वहीं पहुंच गई, जहां से उसने शुरू किया था। विषम परिस्थितियों से जूझने के बाद भी उसने हार नहीं मानी। तनाव उसके दिमाग पर हावी न हो पाए, इसलिए उसने अपनी कहानी को लिखनी शुरू कर दी। उसने अपनी कहानियों को प्रकाशित कराया, और वह आगे चल कर एक बड़ी लेखिका बनी। दादी ने पूछा, तो इस कहानी से तुम क्या समझी? निकिता बोली, यही कि अगर खुद पर विश्वास हो तो कितनी भी विफलताएं आएं, वह हमें कमजोर नहीं बना सकतीं।

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