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इसे आजमाकर देखिए जिंदगी में कभी दुख और तकलीफ से परेशान नहीं होंगे

Thu, 08 Sep 2016 10:44 AM IST
आनंदमूर्ति गुरुमा
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कब्र
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वह दरवेश दिन रात बंदगी करता था। एक दिन हज के लिए रवाना हुआ। चलते-चलते एक गांव में पहुंचा। उसने एक गांव वाले से किसी ऐसे घर के बारे में पूछा, जहां पनाह मिल सके। राहगीर ने शाकिर नाम के अमीर का पता बताया। वह बताए व्यक्ति के घर गया। शाकिर ने उसे ठहराया और आवभगत की। दरवेश दो दिन तक वहां ठहरने के बाद जब तीसरे दिन वहां से चलने लगा, तो शाकिर ने उसके रास्ते के लिए भी इंतजाम किया। चलते वक्त दरवेश ने कहा ‘शाकिर! तुम वाकई बहुत अच्छे हो, मेरे लिए इतना कुछ किया, जबकि तुम मुझे जानते भी नहीं हो। शाकिर ने अपने मकान की ओर देखा और कहा कि ‘गुजर जाएगा।’ दरवेश पूरे रास्ते उसके कहे के बारे में सोचता रहा।
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वह सोचता रहा कि शाकिर ने अपने धन, अपनी अमीरी, अपनी दौलत की ओर इशारा करते हुए क्यों कहा कि गुजर जाएगा। वह मक्‍का पहुंचा, हज किया, वहीं ठहरा और कोई एक साल बाद लौटने लगा। लौटते हुए विचार आया कि एक बार शाकिर से मिलूं। जब दरवेश वहां पहुंचा, तो देखा कि शाकिर का मकान है ही नहीं। पता चला कि अब वह हमदाद के घर में नौकर है। बाढ़ आई थी, उसका मकान बह गया, भेड़ बकरियां भी बह गईं और वह बहुत गरीब हो गया है। इसलिए नौकरी करनी पड़ी। दरवेश बहुत हैरान हुआ। इतना नेक आदमी इतने दुख में! खैर वह शाकिर से मिला। उसकी तकलीफों को देखकर दरवेश ने कहा तेरे जैसे नेक आदमी की यह हालत देख बड़ा दुख हुआ। शाकिर ने कहा यह भी गुजर जाएगा। कुछ समय दरवेश वहीं रहा।

चलते वक्त दरवेश के लिए शाकिर ने फिर भी कुछ रूखा-सूखा बांध दिया। दो-चार साल गुजर गए। दरवेश एक दिन फिर उसी रास्ते से गुजरा। वह हमदाद के घर गया। मालूम हुआ कि हमदाद की मौत हो गई है और उसने अपना सब कुछ शाक‌िर को दे दिया है, क्योंकि उसकी अपनी कोई औलाद नहीं थी। शाकिर फिर अमीर हो गया। बदन पर फिर रेशमी वस्त्र, उसकी बीवी फिर सुंदर कपड़ों में है। बेटियों की शादियां अमीरों के घर हो गई हैं।
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दरवेश अंदर गया और बोला ‘अरे वाह शाकिर! इतना अच्छा। खूब रहमत बरसी।’शाकिर ने फिर कहा, 'यह भी गुजर जाएगा।’अगली बार कोई दो साल बाद दरवेश उसी रास्ते से गुजरा। शाकिर के गांव से गुजरते हुए सोचा कि मिलता चलूं। जब पहुंचा, तो मालूम हुआ कि शाकिर तो मर चुका है। फकीर ने लोगों से उसकी कब्र के बारे में पूछा, ताकि वहां जाकर दुआ कर सके। लोगों ने शाकिर की कब्र का पता दिया। दरवेश कब्र के पास पहुंचा, तो देखा कि वहां एक तख़्ती लगी हुई थी, लिखा था,‘यह भी गुजर जाएगा।’
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