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इंटरनेट या पुस्तक से मंत्र पढ़ने पर कितना लाभ मिलता है

Thu, 17 Oct 2013 12:48 PM IST
अध्यात्मिक गुरू, श्रीमती भानुमति नरसिम्हन
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मन्त्र एक रहस्य है। जिसे गुप्त रखा गया हो, वो अवचेतन मन को सचेत रखता है। मन्त्र चेतना के स्तर पर कार्य करते हैं। जब हम बीज को अंकुरित करना चाहते हैं; उसे भूमि में बोना पड़ता है, छुपाकर, गुप्त। यदि उसे ऐसे ही इधर-उधर बिखेर दिया जाए, तो पक्षी उसे चुग लेंगे।
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हम पुस्तकों व इन्टरनेट द्वारा मन्त्र और उनके लाभों के बारे में पढ़ या सीख सकते हैं लेकिन वह केवल हमारी बुद्धि को संतुष्ट करेगा, अनुभव में अनुवादित नहीं।

जब हम मंत्रोच्चार करते हैं या उन्हें सुनते हैं, हमें मन तथा वाणी की शुद्धि मिलती है। ये हमें ध्यान के लिए तैयार करते हैं। इन ध्वनि स्पंदनों के परिणामस्वरूप, मन के विभिन्न ढांचे प्रशांत होने के लिए अपने आपको पुनः व्यवस्थित कर लेते हैं। उत्तेजना कम हो जाती है, जो हमें भीतर जाने में मदद करती है। उदाहरण स्वरूप, जब हम हंसते हैं, हमारी खुशी बढती है। जब हम रोते हैं, हमारे दुःख का भारीपन निकल जाता है।
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यहां हास्य व रुदन की ध्वनि मात्र ने सहायता की। मंत्र समान शैली में कार्य करते हैं। मन्त्रों का पुनरावर्तन मनोवैज्ञानिक या मानसिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, जो कि शब्दों तथा अभिव्यक्ति की प्रभुता से परे है। इसका केवल अनुभव किया जा सकता है। शब्द कम पड़ जाते हैं क्यूंकि वे अभिव्यक्ति के स्तर से लेकर अनुभवात्मक स्तर से परे नहीं जा सकते।

जब मन शांत व केन्द्रित हो, तभी भीतर की ओर जा सकता है। भीतर की ओर मुड़ा हुआ मन ही दिव्य चेतना की विशालता और सौन्दर्य का अनुभव कर सकता है। जब हमारा ध्यान बाहर की ओर इन्द्रिय-सम्बन्धी पदार्थों पर होता है, हमारा मन बिखरा हुआ रहता है, एक या दूसरी लालसाओं की पीछे भागता है।

शारीरिक इन्द्रियबोध बाह्य सृष्टि के बारे में सब कुछ जान लेने की कोशिश में लगा रहता है। ध्यान भीतरी खोज करने का साधन है। अंतर्मुखी सदा सुखी- जिसका मन भीतर की ओर मुड़ा हुआ हो, वह सदा आनंद में रहता है। मन्त्र वे साधन हैं, जो मन को विलीन करके आत्मा में शांत होने के लिए समर्थ बनाते हैं।

हमें आत्मा में शांत होने की क्या आवश्यकता है? इससे हमारे दैनिक जीवन में कैसे सहायता मिल सकती है? जब नदी शांत होती है, प्रतिबिम्ब स्पष्ट दिखता है। जब मन शांत होता है, अभिव्यक्ति के क्षेत्र में अधिक स्पष्टता आती है। हमारे निरिक्षण, धारणा एवं अभिव्यक्ति की समझ में सुधार होता है। परिणामस्वरूप, हम प्रभावशाली व स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकते हैं।
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साभारः अार्ट ऑफ लिविंग
लेखिका अंतराष्ट्रीय महिला सम्मेलन की अध्यक्षा है।
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