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सीख: जीवन में सफल होने के लिए हार भी एक बड़ी सीख है

Thu, 07 Jun 2018 02:34 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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स्टीव की कहानी, जिसने लगातार हार से सबक सीखकर खुद को एक सफल व्यक्ति साबित किया।

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स्टीव एक मध्यवर्गीय परिवार में पैदा हुआ उसके माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उसकी पढ़ाई ज्यादा दिनों तक करवा पाएं। जितनी भी जमा-पूंजी थी, वह उन्होंने स्टीव के बारहवीं करने के बाद उसके डिप्लोमा के एक कोर्स के लिए जमा कर दी। पर स्टीव को डिप्लोमा करने का कोई शौक नहीं था। उसे तो अपना व्यवसाय करना था। उसने डिप्लोमा किया जरूर, पर सफल नहीं हो पाया। दोबारा फीस देने के पैसे उसके माता-पिता के पास नहीं थे। स्टीव के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। उसने छोटी-मोटी नौकरियां करनी शुरू कर दी।

लेकिन वह जहां भी जाता, वहां ज्यादा दिन टिक नहीं पाता। हालांकि उसका दिमाग अर्थशास्त्र में बहुत तेज था, लेकिन कोई उस पर भरोसा नहीं करता। खुद के लिए और अपने पूरे परिवार के लिए भी वह एक बोझ बनता चला जा रहा था। एक दिन जब वह घर वापस लौट रहा था, तब उसका मायूस चेहरा देख एक शख्स ने उसे पीछे से आवाज दी और पूछा कि तुम क्यों इतने उदास हो? स्टीव ने अपनी व्यथा उस शख्स को सुनाई। वह बोला, अगर मैं आज तुम्हें एक लाख रुपए दूं, तो क्या तुम एक हफ्ते में मुझे वह दोगुना करके दे सकते हो? यह सुनकर स्टीव की आंखें चमक उठीं।
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अर्थशास्त्र में उसकी रुचि तो थी ही। उसने तरह-तरह के सामान बाजार से सस्ते दामों में खरीदे, उन्हें ग्राहक की उपयोगिता के अनुसार थोड़ा परिवर्तित किया और बाजार में ज्यादा दामों में बेचता रहा। एक हफ्ते में उसके एक लाख आठ लाख में बदल चुके थे। जब स्टीव ने उस शख्स के पैसे लौटाए, तो उसने पूछा, तुमने आखिर ऐसा कैसे किया? स्टीव बोला, यही होता है हार का महत्व। मैंने आज तक जहां भी काम किया, वहां यही सीखा कि हार कैसे होती है। और हारते-हारते मैं यह भी सीख गया कि ऐसा क्या करना चाहिए, जिससे हार न प्राप्त हो।

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