हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर भगवान बुद्ध जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार 18 मई, शनिवार को बुद्ध पूर्णिमा है। भगवान बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने जीवन को सुखी और सफल बनाने के लिए कई प्रेरक प्रसंग सुनाए थे। कई प्रसंगों में एक प्रसंग कुछ इस प्रकार है।
एक समय की बात है भगवान बुद्ध से उनके एक शिष्य ने पूछा, भगवन आपने आज तक यह नहीं बताया कि मृत्यु के बाद क्या होता है। उसकी बात सुनकर बुद्ध मुस्कुराए, फिर उन्होंने उससे पूछा, पहले मेरी एक बात का जवाब दो। अगर कोई कहीं जा रहा हो और अचानक कहीं से आकर उसके शरीर में एक जहर भरा तीर लग जाए तो उसे क्या करना चाहिए। पहले शरीर में घुसे तीर को हटाना ठीक रहेगा या फिर देखना कि बाण किधर से आया है और किसे लक्ष्य कर मारा गया है।
शिष्य ने कहा, पहले तो शरीर में घुसे तीर को तुरंत निकालना चाहिए,नहीं तो जहर पूरे शरीर में फैल जाएगा। बुद्ध ने कहा, बिल्कुल ठीक कहा तुमने, अब यह बताओ कि पहले इस जीवन के दुखों के निवारण का उपाय किया जाए या मृत्यु की बाद की बातों के बारे में सोचा जाए। जो हमारे वश में है ही नहीं, उसका विचार ही क्यों करना। किसकी मृत्यु कब आएगी, ये सिर्फ परमात्मा जानता है। मनुष्य के हाथ में सिर्फ कर्म करना है। उसे उन विषयों के बारे में सोच कर वक्त बर्बाद करना ही नहीं चाहिए, जो बातें उसके हाथ में है ही नहीं। उसे सिर्फ उन बातों के बारे में सोचना चाहिए जो वो कर सकता है।