फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जो दूसरों का भला चाहता है, उनका हमेशा भला होता है

Thu, 12 Apr 2018 12:49 AM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन

गौरव की कहानी, जिसे नाश्ते की मेज पर अपने पिता से जीवन की महत्वपूर्ण सीख मिली।

विज्ञापन


गौरव के मम्मी पापा, दोनों काम करते थे। गौरव की मम्मी रोज सुबह अपने ऑफिस के लिए निकल जाती थीं और उसके पापा उसकी देखभाल करते थे। एक दिन पापा ने नाश्ते की मेज पर दो बड़ी-बड़ी कटोरियां रख दीं और गौरव से पूछा, तुम कौन-सी लोगे। गौरव ने देखा, एक कटोरी में पानी भरा था और ऊपर दो उबले अंडे तैर रहे थे। और दूसरी कटोरी में सिर्फ नूडल दिखाई दे रहे थे। गौरव ने अंडों वाली कटोरी ले ली और खाने लगा।

तभी उसने देखा, पापा के पास जो कटोरी थी, उसमें नूडल के नीचे भी दो अंडे थे। पापा समझ गए कि गौरव को पछतावा हो रहा है कि उसने सिर्फ अंडों वाली कटोरी ले ली। वह बोले, देखो बेटा, जरूरी नहीं कि जो दिख रहा है, वही सच हो। कई बार सच पता करने के लिए गहराई में जाना पड़ता है। अगले दिन फिर पापा ने दो कटोरी गौरव के सामने रखीं और पूछा, कौन-सी कटोरी लोगे? आज भी एक कटोरी में उबले अंडे नजर आ रहे थे और दूसरी कटोरी में ऊपर नूडल तैर रहे थे। गौरव ने इस बार नूडल वाली कटोरी ले ली।
विज्ञापन


पर जब उसने खाना शुरू किया, तो देखा कि नूडल के नीचे अंडा नहीं है। गौरव को नूडल टटोलते देख पापा मुस्कराए और कहने लगे, बेटा, आज तुमने यह सीखा कि हर बार अनुभव नहीं काम आता। गौरव समझ गया कि अब सोच-समझकर फैसला करना है। अगली सुबह मेज पर दो कटोरियां थीं। आज एक कटोरी में चार उबले अंडे दिख रहे थे और दूसरी कटोरी में सिर्फ नूडल दिख रहे थे।
विज्ञापन


जब पापा ने गौरव से पूछा कि तुम कौन-सी कटोरी लोगे, तो गौरव ने बड़े प्रेम से कहा, पापा, आज आप ही कटोरियों का चयन करिए। आप जो भी देंगे, मैं खा लूंगा। पापा मुस्कराए और उन्होंने अंडे वाली कटोरी ले ली। गौरव ने देखा कि उसकी कटोरी में नूडल के नीचे तीन अंडे थे। गौरव की आंखों में खुशी झलकने लगी। पापा कहने लगे, आज तुमने यह सीखा कि जो दूसरों का भला चाहता है, उसका हमेशा भला होता है।

छोटी-छोटी बातें भी अक्सर जीवन का फलसफा समझा देती हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें