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आप खुद को कैसे देखते हैं, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है

Sun, 15 Apr 2018 12:21 AM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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चाचा की कहानी, जिसने मायूस हर्ष को जीवन में आगे बढ़ने का हौसला प्रदान किया। हर्ष मायूस हो चुका था। वह जो कुछ भी करने जाता, उसमें उसको सिर्फ हार ही नजर आती थी। अपनी क्लास में भी वह सभी शिक्षकों के मजाक उड़ाने की वजह बन गया था। अपने अंधेरे कमरे में वह अक्सर रोता रहता। एक दिन उसकी सिसकती आवाज सुन उसके चाचा उसके पास आए और पूछा, तुम क्यों रो रहे हो? हर्ष ने चाचा को सारी बात बताई।

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यह सुन चाचा जोर से हंसते हुए बोले, तुम्हें पता है, जब मैं पैदा हुआ और लोगों ने देखा कि इस बच्चे की तो आंखें ही नहीं हैं, तो उन्होंने मेरे माता-पिता को क्या सलाह दी? उन्होंने कहा, इसको मार देना ही अच्छा है, नहीं तो बेचारा जीवन भर तड़पता रहेगा। लेकिन मेरे माता-पिता ने उनकी सलाह नहीं मानी। उन्होंने मुझे विशेष स्कूल में भेजा और पढ़ाया-लिखाया। जब मैं कॉलेज में दाखिला लेने गया, तो कॉलेज प्रशासन ने मेरा दाखिला करने से मना कर दिया।

फिर मैंने विदेशी विश्वविद्यालय में फॉर्म भरा और एमआईटी से स्कॉलरशिप पर स्नातक और परास्नातक की डिग्री ली। लेकिन जब मैं वापस आया, तो फिर पाया कि नेत्रहीन होने के कारण कोई मुझे नौकरी नहीं देना चाहता। फिर मैंने अपनी कंपनी शुरू की, इसलिए नहीं कि मेरे पास बहुत पैसे या कोई अनोखा आइडिया था, बल्कि इसलिए, क्योंकि मेरे पास और कोई चारा ही नहीं था। कोई मुझे नौकरी नहीं दे रहा था। मुझे खुशी है कि आज मैं अपनी कंपनी के जरिये कम से कम 500 नि:शक्तजनों को नौकरी दे पाया।
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हर्ष बोला, लेकिन चाचा जी, आपकी कहानी से मेरा क्या वास्ता? चाचा बोले, जैसे आज लोग तुम्हारी हंसी उड़ाते हैं, वैसे ही जिंदगी भर लोगों ने मुझे भी बेचारा समझा। लेकिन मैंने खुद को कभी वैसा नहीं माना। जब दुनिया मुझे नीची नजरों से देखती थी और यह कहती थी कि तुम कुछ नहीं कर सकते, तब मैं उनकी आंखों में आंखें डालकर बोलता था कि मैं कुछ भी कर सकता हूं। जैसे मैंने इतना सब कुछ किया, वैसे ही तुम भी कर सकते हो।

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