अकबर अपनी तीन बेटियों के साथ लंदन हवाई अड्डे पर भारत वापसी के लिए खड़े थे। खड़े-खड़े अकबर के पैर दर्द कर रहे थे। इतने में बगल से तीन-चार सिक्योरिटी गार्ड सबको किनारे करते हुए गुजरे। वे गार्ड नीली जर्सी में किसी खिलाड़ी को एस्कॉर्ट करके ले जा रहे थे। अकबर और उनके साथ खड़े कुछ लोग बोले, इनके ठाठ देखो। ये जनता के पैसों से खेलते हैं, पर लाइन में खड़े होने का काम हमारा है। पीछे खड़ा एक युवक बोला, पर इनमें और आम जनता में फर्क है। देश का प्रतिनिधित्व करना भी जिम्मेदारी का काम होता है।
अकबर बोला, ऐसी जिम्मेदारी हमें दी जाए, तो हम भी निभा सकते हैं। तब तक अकबर का नंबर आ गया। वह अपना बोर्डिंग पास लेने पहुंचा, तो काउंटर पर खड़ी महिला ने उनसे बड़ी विनम्रता से कहा, सर, एक बुजुर्ग महिला हैं, जिन्हें चलने में दिक्कत होती है। आज की फ्लाइट पहले से बुक होने के कारण उन्हें आगे की कोई सीट खाली नहीं मिल पा रही। आगे की चार सीटें आपकी ही हैं। अगर आपमें से कोई एक पीछे चला जाए, तो बुजुर्ग महिला को आसानी हो जाएगी। वह महिला भी भारतीय हैं।
अकबर ने मना कर दिया। वह बुजुर्ग महिला पीछे खड़ी सब सुन रही थीं। प्लेन में बैठने पर अकबर ने देखा कि वह महिला उसी के बगल वाली सीट पर बैठी थी। उन्होंने पूछा, तो किसी ने आपको अपनी सीट दे ही दी। महिला बोली, आपके पीछे जो खिलाड़ी युवक था, उसी ने दी। अकबर ने युवक को देखा, वह वही युवक था, जो उसके पीछे खड़ा था। अभी वह नीली जर्सी में था और खिलाड़ियों के बीच बैठा था। अकबर ने उससे कहा, आप चाहें, तो मेरी सीट पर बैठ सकते हैं। युवक बोला, मैंने उस महिला को अपनी जगह एक भारतीय होने के नाते दी है। मुझे अपने देश और उसके लोगों की जिम्मेदारी निभाना आता है।