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सीख-अपने पास बस यही एक पल है, चाहो तो इसे जी लो, चाहो तो जाने दो

Mon, 27 Aug 2018 04:06 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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कियान अपनी मम्मी के साथ बस स्टॉप पर खड़ा बस का इंतजार कर रहा था। सुबह का समय  था और बस स्टॉप पर भीड़ काफी थी। कियान वहां खड़े सभी लोगों को गौर से देख रहा था। वहां पच्चीस-छब्बीस साल की एक लड़की खड़ी थी, जो शायद कॉलेज जा रही थी। वह लगातार फोन पर कुछ टाइप कर रही थी। उसके पीछे एक बुज़ुर्ग अपने हाथ में एक पुरानी-सी मिक्सी एक  बड़े-से झोले में लिए खड़े थे। शायद वह उसे ठीक कराने ले जा रहे होंगे। उनके पीछे एक व्यक्ति टाई-सूट पहन कर ऑफिस जाने का इंतजार कर रहा था।

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इसके अलावा वहां दो छात्र और एक महिला भी खड़ी थी। देखते-देखते जोर की बारिश शुरू हो गई। लोग भीगने से बचने के लिए शेड  के नीचे जाकर खड़े हो गए। लेकिन कियान ने मां से कहा कि उसे बारिश में भीगना है। मां मना कर रही थी, पर कियान मां से बोला, आप ही तो कहती हो कि जो होता है, अच्छे के लिए  होता है। मां मुस्कराते हुए बोली, पर देखो, यहां कोई नहीं भीग रहा। वहां खड़े लोग मां-बेटे की बातें सुन रहे थे।

एक बुजुर्ग ने कहा, बेटा, बारिश में भीगोगे, तो तबियत खराब हो जाएगी। कियान बोला, मां कहती है, हमें अपने आज को जीना चाहिए। छोटी-छोटी खुशियों  का मजा लेना चाहिए। उसने वहां खड़े लोगों से पूछना शुरू किया, आप आखिरी बार बारिश में कब भीगे थे। पर इसका जवाब किसी के पास नहीं था। सब अपनी-अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो गए थे कि किसी के पास बारिश में भीगने का न समय  था, न मन। तभी कॉलेज जा रही  लड़की बोल पड़ी, यह सही तो कह रहा है। हम बड़े उद्देश्यों को पाने के लिए छोटी-छोटी खुशियों से समझौते करने लगते हैं। कियान ने उसका हाथ पकड़ा और दोनों बारिश में भीगने चले गए। उस एक पल ने हर किसी को प्रफुल्लित कर दिया।

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