नमिता को एक दिन अपने ऑफिस से निकलने में काफी देर हो गई। रात के एक बज रहे थे और वह तेजी से खाली सड़कों पर अपनी गाड़ी दौड़ाती घर की तरफ जा रही थी। तभी एक सुनसान जगह पर उसकी गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो गया। हर तरफ एकदम घना अंधेरा था और सड़क पर कोई आती-जाती गाड़ी नहीं थी। उसने किसी दोस्त को कॉल करने के लिए अपना फोन उठाया, लेकिन काम के चक्कर में वह अपना फोन चार्ज करना भूल गई थी और वह भी ऑफ हो चुका था।
डरी सहमी नमिता गाड़ी से बाहर निकल कर मदद के लिए चिल्लाने लगी। तभी उसने देखा एक बूढ़ा सा व्यक्ति, ठंड से कांपता-ठिठुरता उसकी तरफ आ रहा है। नमिता को डर लग रहा था, लेकिन उस व्यक्ति से मदद मांगने के सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं था। जब उस व्यक्ति ने नमिता की बात सुनी, तो वह बोला, तुम बंद करके गाड़ी में बैठ जाओ, मै अभी आता हूं। लगभग डेढ़ घंटे बाद वह व्यक्ति एक बोतल में थोड़ा पेट्रोल लेकर आया और बोला, मेरे पास अभी सिर्फ तीस रुपए थे, इसलिए मैं थोड़ा ही पेट्रोल ला सका। नमिता ने उस व्यक्ति का शुक्रिया अदा किया और तेल गाड़ी में डाल कर जल्दी से घर लौट गई।
अगले दिन नमिता उसी जगह पहुंची, जहां उस व्यक्ति ने उसकी मदद की थी। जब नमिता ने उस व्यक्ति के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि वह एक रेस्टोरेंट का मालिक हुआ करता था। लेकिन शराब की लत और जुए की वजह से वह अपना सब कुछ हार गया और फुटपाथ पर रहने को मजबूर हो गया। नमिता ने उस व्यक्ति को खूब सारा खाना और कुछ पैसे दिए और साथ ही अपने सारे दोस्तों से उसकी नौकरी की बात भी की। कुछ ही दिनों में उसे एक छोटे से रेस्टोरेंट में मैनेजर की नौकरी मिल गई। एक तरफ उस व्यक्ति ने अपनी परवाह किए बगैर नमिता की ऐन वक्त पर मदद की, और दूसरी तरफ नमिता की वजह से उस व्यक्ति को दोबारा से नई जिंदगी मिली।