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सीख: सिर्फ सफलता या नंबर ही किसी को आंकने का पैमाना नहीं होना चाहिए

Fri, 02 Feb 2018 10:58 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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बड़ी कंपनी में प्रेसिडेंट थे। लेकिन अपने काम में वह इतना व्यस्त रहते थे कि घर के लोगों के लिए कम ही समय निकाल पाते थे। लेकिन कियान के लिए उन्होंने हर सुख-सुविधा का प्रबंध कर रखा था। कियान छठी में पढ़ता था, लेकिन अभी से उसको सबसे अच्छे कोचिंग क्लास की टीचर पढ़ाने आती थी।
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कियान को उनसे पढ़ते हुए दो साल हो गए थे। फिर भी परीक्षा में उसके अंक कम ही आते थे। एक दिन कियान के पिता ने टीचर से शिकायत करते हुए कहा, आपके पढ़ाने का आखिर फायदा ही क्या है, जब उसके अच्छे नंबर ही न आएं। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उसे कितने घंटे पढ़ाती हैं या कितने पैसे चाहती हैं।

मैं बस यही चाहता हूं कि उसके अच्छे नंबर आएं। टीचर मुस्कराते हुए बोली, तो फिर ठीक है, आप मुझे दस लाख रुपये प्रति घंटा वेतन दीजिए, उसके नंबर अच्छे आने की जिम्मेदारी मेरी। कियान के पिता दंग रह गए। वह बोले, दस लाख रुपये प्रति घंटा। इतना तो मैं भी नहीं कमाता।
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टीचर बोली, तो आप ओवर टाइम करिए, थोड़ी और मेहनत करिए, ऐसे कैसे चलेगा? अच्छे नंबरों के लिए कुछ तो आपको भी करना पड़ेगा न। कियान के पिता बोले, लेकिन मैं कितना भी कमा लूं, दस लाख प्रति घंटा फीस नहीं दे सकता।

टीचर बोली, आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? आपकी इतनी भी हैसियत नहीं कि आप इतनी मामूली फीस चुका पाएं? कियान के पिता बोले, क्या मतलब है आपका? मैं एक इज्जतदार व्यक्ति हूं और मेरी समाज में इज्जत है। सिर्फ पैसों से कोई आदमी बड़ा नहीं बन जाता।

टीचर बोली, ठीक उसी तरह से सर, जैसे अच्छे नंबर से कोई बच्चा अच्छा नहीं बन जाता। कियान एक बहुत होनहार लड़का है। पिछली बार की तुलना में इस बार उसे पांच फीसदी अधिक नंबर आए हैं। धीरे-धीरे हमारे ध्यान और प्यार से वह अपने हुनर को तराश रहा है।
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