ईश्वर की राह पर आप चल सको, ज्ञान की, सत्य की राह पर तुम बढ सको, इसके लिये निरंतर सुनने की, समझने की और समझे हुए को शोध करने की आवश्यकता आती है। बुद्ध का सूत्र है, ‘पाप न करना, पुण्य करना, चित्त का शोध करना, यही बुद्धों का शासन है।’ चित्त का शोध करने का मतलब, प्रतिपल जागृत रहते हुए, होशपूर्वक जो भी अभी, इसी पल आपके सामने हो रहा है, उसको देखना।
देखते हुए इसे ध्यान में रखना कि जैसा आज है, वैसा कल नहीं रहेगा, सब बदल जाएगा। लेकिन इस बदलते हुए समय और इस बदलते हुए परिवेश को जो देख रहा है, वह कभी नहीं बदलता है।
जीवन जीने की यह नई राह है। इस राह पर चलो, पुराने रास्ते से जितनी जल्दी छूट सको, उतनी जल्दी छूटो। पुरानी आदत थी, चीज़ों को पकड़ने की। अब नई आदत डालो, चीज़ों को छोड़ने की। आज तक चीज़ों को पकड़ना सीखा है, अब इनको छोड़ना भी सीख लो।
लेकिन छोड़ना सिर्फ़ बुद्धि से न हो, छोड़ना समझ से हो। क्योंकि अब ‘नई ज़िन्दगी मिली है। इस नए जीवन में, नये ढंग में साथी भी नए होने चाहिए। पुराने यार-दोस्त पुरानी बातें करेंगे। पुराने मित्र कहेंगे, ‘चल शापिंग करने चलें, कपड़े खरीदने चलें। नयी राह के नए साथी कहेंगे, ‘चीज़ें जोड़कर क्या करना है। जितना उपयोगी है, उतना रखो, बाकी काहे को इकट्ठा करना?
नया जीवन उसको मिलता है, जो नई राह पर चलने की हिम्मत रखता है। नए जीवन में हर रोज़ सुबह उठो, तो अपने हृदय में विराजमान ईश्वर से कहो कि ‘तेरी राहों पर चलती रहूंगी। दर पर आयी हूं आती रहूंगी। आप सभी ईश्वर की राह पर, इस नयी राह पर चलते रहो, अपने नए जीवन में अमृत के जाम भर-भरकर पीते रहो और पी-पीकरजीते रहो, यही मंगलकामना आप सभी के लिये करती हूं।