कोई एक ही इस आत्मतत्व को आश्चर्य से देखता है, और वैसे ही दूसरा कोई ही इसे दूसरों को बताता है, जिन्हें बताता है, उनमें भी कोई ही सुनना जानता है, परंतु कोई कोई सुन कर भी इसे नहीं जानता।
आश्चर्य है कि बहुत कम लोग इसे जान पाते हैं। गीता का यह श्लोक (2-29) विचारों को झकझोरने के लिए काफी है। हमारे आसपास करोड़ों-अरबों चमत्कार हो रहे हैं। परंतु हम उनको देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। जितनी आपकी बुद्धि अविकसित होगी, उतनी छोटी-सी चीज आपको विस्मित कर देगी। और यदि आपकी बुद्धि बहुत विकसित होगी तो सूक्ष्म से सूक्ष्म चीज़ भी आपको आश्चर्य चकित कर देगी।
कोई व्यक्ति नियाग्रा फॉल, ग्रैंड कैनियन या माऊंट एवरेस्ट को देख कर आश्चर्यचकित हो जाता है। परंतु जिनकी बुद्धि और विकसित हो तो उनको आश्चर्यचकित होने के लिए माऊंट एवरेस्ट जाने की जरूरत नहीं, वे तो पहली बारिश के चमत्कार से ही आश्चर्यचकित हो जाएंगे। और अध्यात्म विद्या में विकसित व्यक्ति को एक अनार के दानों की पैकिंग या एक नारियल की अंदरूनी संरचना ही अत्यधिक आश्चर्यचकित कर देती है।