कुछ दिन पहले भारतीय योग पद्घति के महत्वपूर्ण अंश प्रणायाम का लाभ डीप ब्रीदिंग के आधार पर माना जाता था और जो लाभ मिलते थे उन्हें गहरी सांस लेने का प्रतिफल माना जाता था। पर अब समझा जाने लगा है कि प्राण एक जीवंत विद्युत है, जो शरीर से भी अधिक मन क्षेत्र को प्रभावित करती है। मनुष्य को साहसी, पराक्रमी, तेजस्वी और स्फूर्तिवान बनाती है।
इस उपलब्धि को यदि समुचित मात्रा में हस्तगत किया जा सके तो सामान्य दिखने वाला मनुष्य भी अपनी असाधारण विशिष्टता का परिचय दे सकता है। शरीर और मस्तिष्क में बिजली के असाधारण आवेश पाए गए हैं। वे ही मस्तिष्कीय घाटकों और शारीरिक जीवकोणों में अभिनव ऊर्जा का संचार करते और मनुष्य को उत्साहित, प्रसन्न, क्रियाशील और साहसी बनाए रखते हैं।
यह विद्युत शक्ति ऑक्सीजन से सर्वथा भिन्न है। वह उन्नत आकाश से मस्तिष्कीय केन्द्र संस्थानों द्वारा अवतरित आकर्षित होती है। इसे खींचने से मन को गंगावतरण के लिए किए गए भगीरथी तप की भांति निरस्त होना पड़ता है। प्राणायाम माध्यम सही है पर यदि उनके साथ श्रद्धा विश्वास का पुट न होगा तो सांस भर का लाभ मिलेगा। प्राण शक्ति का जिसे मानवीय ऊर्जा का पर्याय भी कह सकते हैं, विकास नहीं हो सकेगा।
उस ऊर्जा को विज्ञानियों ने विद्युत की तरह बताया है। इस विद्युत की नापतौल भी होने लगी है। देखा गया है कि मनुष्य शरीर में बिजली का जितना भंडार भरा पड़ा है, उससे साठ वाट का बल्ब जलाया जा सकता है। पूरे शरीर में फैली हुई बिजली का आकलन किया जाय तो प्रतीत होगा कि शरीर चलते फिरते जेनरेटर की तरह है।
जिन लोगों में विद्युतीय व्यवस्था थोड़ी गड़बड़ाई रहती है, उन्हें छूने पर झटके भी लगते हैं। योगी राम का कहना है कि अभ्यास ठीक से किया जाए तो यह ऊर्जा स्वास्थ्य, प्रतिभा और कार्यक्षमता के रूप में चमत्कारी परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं।