बाग में एक गुलाब का फूल खिला, उसे देख बाग के सभी पेड़-पौधे मुस्कराने लगे। जैसे-जैसे गुलाब बड़ा हो रहा था, वैसे-वैसे सभी पेड़-पौधे गुलाब की खूबसूरती से मंत्रमु्ग्ध हो रहे थे। देवदार का पेड़ बोला, काश, हम भी गुलाब के जैसे खूबसूरत होते। बगल में खड़े दूसरे पेड़ ने कहा, दिल क्यों छोटा करते हो दोस्त। हम सब भी तो सुंदर हैं।
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बगल में खड़े एक ताड़ ने कहा, मुझे नहीं लगता कि बाग में गुलाब से खूबसूरत कोई पेड़ होगा। सूरजमुखी ने कहा, क्यों, क्या मैं सुंदर नहीं? हम सभी खूबसूरत हैं, खुद पर भरोसा रखो। गुलाब जैसे-जैसे बड़ा हो रहा था, उसका अहं भी बढ़ता जा रहा था। गुलाब से थोड़ी ही दूर कैक्टस का एक पेड़ लगा था। अहंकारी गुलाब ने तय कर लिया कि वह अपनी जगह बदल लेगा। सारे पेड़ हैरत में पड़ गए और इसकी वजह पूछने लगे। गुलाब बोला, मुझ जैसे खूबसूरत फूल की जगह इस कटीले कैक्टस के साथ कैसे हो सकती है? बगल में खड़े बरगद चचा ने गुलाब को समझाया, बेटे, तुम्हारी खूबसूरती तभी तक है, जब तक तुम अपने जैसे अन्य गुलाब के पौधों के साथ नहीं हो। पर गुलाब ने किसी की नहीं सुनी और कैक्टस से दूर चला गया। हर दिन वह कैक्टस को खूब कोसता।
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गर्मी चरम पर पहुंच गई थी। बारिश का नाम-ओ-निशान नहीं था। पेड़-पौधे पानी की किल्लत से मुरझाने लगे। गुलाब ने देखा, कुछ गौरैया कैक्टस में अपनी चोंच घुसातीं और भाग जातीं। गुलाब हैरत में था कि गौरैया ऐसा क्यों कर रही हैं। तभी बगल के एक पौधे ने बताया, कैक्ट्स में पानी का भंडार होता है। गौरैया चोंच से कैक्टस के अंदर का पानी पी रही हैं। गुलाब की आंखें खुल गईं। वह बोला, पर कैक्टस में तो कांटे होते हैं। पौधा बोला, हां, पर वह गौरैया के लिए अपने कांटे गिरा देता है। गुलाब को अपनी भूल समझ आ गई। अगर वह इस वक्त कैक्टस के बगल में होता, तो वह भी कैक्टस की मदद से ज्यादा समय तक जीवित रह सकता था।