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सीख: हताशा को खुद पर हावी न होने देना ही तमाम समस्याओं का समाधान है

Mon, 18 Jun 2018 04:38 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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ज्योतिषी की कहानी, जिसने किसलय को हताशा से बाहर निकालकर उसकी दुनिया बदल दी।

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किसलय एक पत्रकार था। पर कुछ दिनों से उसके सारे काम बिगड़ते जा रहे थे। वह जिस भी रिपोर्ट पर काम करता, उसे या तो पहले ही कोई और अखबार छाप देता, या अपना काम
वह पूरा नहीं कर पाता। इस कारण ऑफिस में भी कई बार उसे सुनना पड़ता। घर पर भी पिता से किसी न किसी बात पर उसका झगड़ा हो जाता। एक बार उसने एक ज्योतिषी से
समाधान पूछा। ज्योतिषी ने उसका हाथ देखने के बाद कहा, आप पत्रकार हैं और कलम तो हमेशा आपकी जेब में रहती ही है।

जब भी आपको ऐसा लगे कि आपका काम नहीं बन रहा या आप कहीं विफल महसूस कर रहे हैं, तो अपनी हथेली पर कलम से उस शख्स या परिस्थिति के नाम से एक छोटी-सी लकीर खींच लीजिए। फिर सोचिए कि एक नई शुरुआत करनी है। एक हफ्ते बाद आकर मुझसे मिलिए। ध्यान रहे कि हथेली को धोना नहीं है। किसलय सोचने लगा कि यह ज्योतिषी जरूर फर्जी है। भला ऐसे भी कोई उपाय बताता है? लेकिन फिर उसे लगा कि कोशिश करने में क्या हर्ज है। लिहाज वह अपनी हर विफलता, हर बहस, हर गुस्से, हर फटकार, हर शर्मिंदगी के लिए एक लकीर बना लेता और सोचता, यह हो गया, अब नई शुरुआत करते हैं।
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एक हफ्ते बाद जब वह ज्योतिषी से वापस मिला, तो उन्होंने पूछा, क्या कोई बदलाव हुआ? किसलय बोला, मेरा सब कुछ बदल गया। मेरे पास हर दिन एक नई अनोखी खबर रहती है। मेरे इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों के लिए मैं एकदम से सबसे करीबी बन गया हूं। मेरा परिवार भी मेरी क्षमताओं को समझने लगा है। ज्योतिषी ने देखा, किसलय की एक हथेली एकदम भरी हुई है। वह बोले, हम अक्सर अपने ख्यालों का बोझ दिमाग से खाली करना भूल जाते हैं। मन में हर पल कुछ नया और अच्छा करने का विश्वास रहे, तो हमें सफलता से कौन रोक सकता है!

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