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सीख: मनुष्य को उसकी काबिलियत से आंकना चाहिए, पहनावे से नहीं

Mon, 18 Jun 2018 03:39 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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माधव चौहान की कहानी, जिसने मायरा को बहुत छोटी उम्र में जीवन की बहुत बड़ी सीख दी।

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माधव चौहान अमीर और सफल उद्योगपति थे। उनकी दस साल की एक बेटी थी, जिसका मायरा नाम था। एक दिन माधव जी अपनी बेटी से बोले, आज मैं तुम्हें जिंदगी की सबसे बड़ी सीख देने जा रहा हूं। लेकिन तुम अपना परिचय किसी को न बताना। फिर उन्होंने मायरा को एक फैशन डिजाइनर के साथ तैयार होने भेज दिया। मायरा खूबसूरत आभूषण और
बेशकीमती कपड़े पहनकर आ आई। अब माधव जी ने अपने ड्राइवर से कहा, इसे शहर के बीच बाजार में छोड़ आइए।

बाजार में अनेक तरह के लोग थे। खुद को अकेला पाकर मायरा डर गई और रोने लगी। उसे बाजार के बीच अकेले खड़े देख हर कोई उसकी तरफ आकर्षित हुआ। सबको यह लग रहा था कि इतनी प्यारी बेटी को कौन अकेला छोड़कर चला गया। सबने उसके लिए चिंता जाहिर की, और कुछ ने उसकी खातिरदारी भी की। थोड़ी देर बाद एक सज्जन आए और उसने मायरा को उसके घर पर छोड़ दिया। माधव जी ने फिर मायरा को तैयार होने को भेजा।
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इस बार शहर के एक गरीब परिवार को मायरा को तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। उसे फटे-पुराने कपड़े पहनाए गए और सारे आभूषण हटा दिए गए। शहर के पिछड़े इलाकों से गुजरने के कारण उसके बाल धूल से भर गए मायरा को बाजार में छोड़ दिया गया। पर इस बार उसकी तरफ किसी ने नहीं देखा। जिन लोगों ने उसकी पहले खातिरदारी की थी, इस बार उन्होंने मायरा को दुत्कार दिया। वह यह अपमान सहन नहीं कर पाई। वह रोते-रोते माधव जी के पास लौटी और उन्हें पूरी कहानी सुनाई। माधव जी बोले, मुझे माफ करना कि मैंने तुम्हें जान-बूझकर ऐसे अनुभव का हिस्सा बनाया। मैं तुम्हें सिर्फ यह सिखाना चाह रहा था कि आज जो तुम्हारे साथ हुआ, तुम वैसा किसी के साथ कभी न करना। किसी को उसकी वेशभूषा से नहीं आंकना चाहिए।

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