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चाणक्य नीति: विद्यार्थियों के लिए बड़े काम की हैं आचार्य चाणक्य की ये बातें, सफल होने के लिए जरूर करें पालन

Thu, 08 Feb 2024 12:13 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आचार्य चाणक्य ने विद्यार्थियों के बारे में भी कई जरूरी बातें बताई हैं। उनका मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। चाणक्य के अनुसार विद्यार्थियों के जीवन पर परिवार के साथ-साथ आसपास का परिवेश और शिक्षा का प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन कई बार उनके आसपास का माहौल बेहतर नहीं होता है, फिर भी वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।
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विद्यार्थियों के लिए बड़े काम की हैं आचार्य चाणक्य की ये बातें - फोटो : iStock
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विस्तार
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आचार्य चाणक्य अपने समय में महानतम शिक्षकों में से एक थे। वे एक महान रणनीतिकार और दूरदर्शी थे। उन्होंने चाणक्य नीति जैसा महान ग्रंथ लिखा है, जिसमें लोक कल्याण की बातें सूत्रों के रूप में निहित हैं। चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति चाणक्य नीति में बताई गई बातों का पालन करता है, तो वह अपने जीवन को सफल बना सकता है। आचार्य चाणक्य ने विद्यार्थियों के बारे में भी कई जरूरी बातें बताई हैं। उनका मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। चाणक्य के अनुसार विद्यार्थियों के जीवन पर परिवार के साथ-साथ आसपास का परिवेश और शिक्षा का प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन कई बार उनके आसपास का माहौल बेहतर नहीं होता है, फिर भी वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। दरअसल इसके पीछे कुछ सूत्र काम करते हैं। इन सूत्रों के बारे में चाणक्य ने अपनी नीति में विस्तार से बताया है। चलिए जानते हैं इसके बारे में...

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Chanakya Niti: अगर इन बातों पर नहीं दिया ध्यान, तो जीवन में असफलता के सिवा कुछ नहीं लगेगा हाथ

नींद पर नियंत्रण
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो छात्र नींद पर नियंत्रण नहीं कर सकता, वह ज्ञान और अनुभव के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए सही समय पर जागना और सही समय पर सोने के साथ ही नींद पर नियंत्रण रखना अति आवश्यक है।
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हास-परिहास से दूर
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो छात्र ज्यादा हंसी मजाक करते हैं वो पढ़ाई से धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। कई बार ज्यादा हंसी-मजाक मतभेद का भी कारण बन जाता है। ऐसे में विद्यार्थी को अपनी सीमा में रहकर ही हंसी-मजाक करना चाहिए।

क्रोध पर नियंत्रण
चाणक्य नीति कहती है कि जो छात्र अपने क्रोध पर काबू नहीं कर सकता, वह ज्ञानी होकर भी अज्ञानी के समान होता है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति क्रोध में होता है तो उसके सोचने समझने की शक्ति कम हो जाती है, इसलिए विद्यार्थी को अपने क्रोध को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए।

लोभ की भावना से दूर
चाणक्य कहते हैं कि विद्यार्थियों के अंदर लोभ यानी लालच की भावना नहीं होनी चाहिए। इस पर नियंत्रण रखना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों के मन में सिर्फ एक बात का लालच होना चाहिए और वो है ज्ञान का अर्जन का।

स्वाद पर नियंत्रण
विद्यार्थियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो उन्हें अच्छे स्वास्थ्य के साथ बुद्धि विकास में भी मदद करे। जिन छात्रों को जिह्वा का स्वाद लग जाता है उसका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लग सकता। इसलिए चाणक्य कहते हैं कि विद्यार्थियों को सादा भोजन ही करना चाहिए।

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श्रृंगार से दूर
चाणक्य नीति के अनुसार विद्यार्थी जीवन में छात्रों को शृंगार आदि से दूर रहना चाहिए, क्योंकि जो बच्चे सिर्फ सजने संवरने में मन लगाएंगे उनका मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगेगा। 

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