गेरुआ रंग इस बात की घोषणा है कि जीवन में एक नया प्रकाश आ गया है। सुबह-सुबह जब सूर्य निकलता है, तो उसकी किरणों का रंग केसरिया होता है। इसे भगवा, गेरुआ या नारंगी रंग भी कह सकते हैं। गेरुआ यही दिखाने के लिए पहनते हैं कि आपके जीवन में एक नया सवेरा हो गया है। दूसरी चीज है बाहरी दुनिया। जब आप यह रंग पहनते हैं तो लोग जान जाते हैं कि यह संन्यासी है।
हमारे शरीर में मौजूद सातों चक्रों का अपना एक अलग रंग है। भगवा या गेरुआ रंग आज्ञा चक्र का रंग है और आज्ञा ज्ञान-प्राप्ति का सूचक है। तो जो लोग आध्यात्मिक पथ पर होते हैं, वे उच्चतम चक्र तक पहुंचना चाहते हैं इसलिए वे इस रंग को पहनते हैं। कोई व्यक्ति सिर्फ इसी वजह से सर्व-गुण-संपन्न या कहें दोषरहित नहीं हो सकता कि उसने संन्यास ले लिया है।
वह ऐसा बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह संपूर्ण नहीं है। उसकी अपनी कमजोरियां हैं, उसकी अपनी समस्याएं भी हैं। तो जब वह एक खास किस्म के और खासकर गेरुआ वस्त्र पहनता है तो उसके आसपास के लोग उसे समझते हैं और उसकी मदद करते हैं।