फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीख: वर्तमान में जीना ही जीना होता है, वही हमारे लिए सबसे अच्छा है।

Fri, 29 Dec 2017 01:12 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
आदित्य और उसके दोस्त अपने प्रोफेसर के साथ दूर किसी जगह पिकनिक पर जा रहे थे। पर क्रिसमस और नए साल की वजह से रास्ते में बहुत जाम था। उनको कॉलेज से निकले छह घंटे हो चुके थे और वे अभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए थे। जबकि आम तौर पर कॉलेज से पिकनिक स्पॉट तक पहुंचने में चार घंटे से ज्यादा नहीं लगता था। आदित्य बोला, अच्छा होता कि हम किसी पास की जगह गए होते। इतने में उसका एक और दोस्त मयंक बोला, मैं तो यहां आना ही नहीं चाहता था। तुम्हीं लोगों ने मुझे जबर्दस्ती बुला लिया। न तो हम पिकनिक मना पा रहे हैं और न ही मैं अपना काम कर पाया। अगर मैं घर पर होता, तो अब तक अपना रिसर्च प्रपोजल तैयार कर लिया होता।
विज्ञापन


पढ़ें-सीख: खुद पर करें विश्वास तो अच्छी चीजें मिलने में नहीं लगती देर

उनके प्रोफेसर राजेंद्रन यह सब सुन रहे थे। वह बोले, बेटा यह एकदम गलत सोच है कि अगर हमने वैसा किया होता, तो हम ज्यादा खुश होते। ऐसा सोचने की वजह से हम अपने आज को कभी पूरी तरह से नहीं जी पाते। हम यही सोचते रह जाते हैं कि जो हो रहा है, उसके बजाय कुछ और हुआ होता, तो हम खुश होते। हालांकि सच यह है कि जो अभी हमारे साथ हो रहा है, वही हमारे लिए सबसे उत्कृष्ट होता है।

पढ़ें- जैसा करेंगे भोजन मन में अाएंगे उसी तरह के विचार

अगर हम अपने आज को अच्छे से जी लें, तो इससे बेहतर कुछ और हो ही नहीं सकता। आदित्य बोला, लेकिन सर, यह बात तो सच है कि अगर हम घर पर होते, तो इतना समय जो हमने अपनी यात्रा में नष्ट किया है, वह बच जाता। प्रोफेसर बोले, चलो, एक काम करते हैं। रोहित आज हमारे साथ नहीं आया है न। जरा उससे पूछो तो, क्या उसने कुछ काम किया है? आदित्य ने जब रोहित को कॉल किया, तो पाया कि रोहित यही सोच रहा था कि काश, वह भी अपने दोस्तों के साथ पिकनिक पर चला जाता, तो पिकनिक के मजे तो ले पाता। प्रोफेसर बोले, जो अपने वर्तमान को ठीक तरह से नहीं जी सकता, वह कभी अपना भविष्य भी ठीक से नहीं बना सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें