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सुबह उठने से पहले करें यह काम तो दिन बन जाएगा

Wed, 19 Nov 2014 02:58 PM IST
श्रीराम शर्मा आचार्य/अध्यात्मिक गुरू
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जीवन में सफलता और उन्नति का एक साधन है मनन और चिंतन। चिंतन का मतलब यह नहीं कि आप समस्याओं को लेकर चिंता में डूबे रहें। चिंतन वह साधन है जिससे आपको उन्नति और कार्य में सफलता का रास्ता दिखता है। और इस काम के लिए सबसे बढ़िया समय रात को सोने से पहले और सुबह उठने से पहले का वक्त है।
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प्रातःकाल आंख खुलते ही और रात को सोने के लिये बिस्तर पर जाते चिंतन आरंभ करना चाहिए। आंख खुलने और बिस्तर छोड़ने के बीच प्रातःकाल कुछ तो समय रहता है। कोई भी व्यक्ति आंख खुलते ही तुरंत नहीं उठ बैठता। कुछ समय ऐसे ही सब लोग पड़े रहते हैं। इस समय को मनन में लगाना चाहिये।

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अपने आपसे, अपने और अपने शरीर के बीच का अन्तर, अपना स्वरूप, जीवन का उद्देश्य, परमेश्वर की मनुष्य से आकांक्षा, इस सुर दुर्लभ मनुष्य जन्म का श्रेष्ठतम सदुपयोग करने की बात पर प्रत्येक पहलू से विचार किया जाना चाहिए और समीक्षा की जानी चाहिए कि अपनी वर्तमान गतिविधियां आदर्श जीवन पद्धति से तालमेल खाती हैं या नहीं?
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यदि अन्तर है तो वह कहां है, कितना है? इस अंतर को दूर करने के लिए जो किया जाना चाहिए वह किया जा रहा है या नहीं? यदि नहीं तो क्यों? यह प्रश्र ऐसे हैं जिन्हें अपने आप से गंभीरता पूर्वक पूछा जाना चाहिए और जहां सुधार की आवश्यकता हो उसके लिए क्या कदम किस प्रकार उठाया जाय, इसका निर्णय करना चाहिए।

हर दिन नया जन्म, हर रात नई मौत की अनुभूति यदि की जा सके तो उससे उत्कृष्ट जीवन जीने की बहुत ही सुव्यवस्थित योजना बन जाती है। हर दिन एक जीवन मानकर चला जाय और उसे श्रेष्ठतम तरीके से जीकर दिखाने का प्रातःकाल ही प्रण कर लिया जाय तो यह ध्यान दिन भर प्रायः हर घड़ी बना रहता है कि आज कोई निकृष्ट विचार मन में नहीं आने देना है, निकृष्ट कर्म नहीं करना है, जो कुछ सोचा जायेगा वैसा ही होगा और जितने भी कार्य किये जाएंगे उनमें नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

प्रातःकाल पूरे दिन की दिनचर्या निर्धारित कर लेनी चाहिए और सोच लेना चाहिए कि उस दिन भर की क्रिया पद्धति में कहां कब कैसे अवांछनीय चिंतन का, अवांछनीय कृति का अवसर आ सकता है। उस आशंका के स्थल का पहले ही उपाय सोच लिया जाय, रास्ता निकाल लिया जाय तो समय पर उस निर्णय की याद आ जाती है और संभावित बुराई से बचना सरल हो जाता है।
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