फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर व्यक्ति के जीवन में दु:ख का एक मात्र कारण और उपचार यह है

Thu, 22 Jan 2015 02:49 PM IST
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य/ शांतिकुंज, हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन
अंधकार एक नकारात्मक सत्ता है, प्रकाश का अभाव है। यह प्रकाश कई बार परिस्थितियों के कारण भी लुप्त हो जाता है, किन्तु वैसी स्थिति में परमात्मा ने मनुष्य को वैसी क्षमता दे रखी है कि वह उनका उपयोग कर प्रकाश के अभाव को दूर कर सके। लेकिन अंधकार को देख-देख कर ही जिसे भयभीत होते रहना हो, परेशान और दुखी रहना हो, तो उसके लिए अंधकार से मुक्त होने का कोई उपाय नहीं है।
विज्ञापन


दुःख भी अंधकार के समान नकारात्मक भाव है। उसका कोई अस्तित्व नहीं है। व्यक्ति अपनी भ्रान्तियों, गलतियों और त्रुटियों की तंग कोठरी में बन्द होकर चारों ओर खिले हुए सुख तथा आनंद से वंचित रहे, तो इसमें परमात्मा का कोई दोष नहीं है।

उसने तो सृष्टि में चारों ओर सुख, आनंद तथा प्रफुल्लता का प्रकाश बिखेर रखा है। अपनी भ्रान्तियों और त्रुटियों की दीवारों में, समझ और दर्शन के दरवाजों, खिड़कियों को बंदकर कृत्रिम रुप से अंधकार पैदा किया जा सकता है। प्रायः जो दुःखी, संतप्त, व्यथित और वेदनाकुल दिखाई देते हैं, उनकी पीड़ा के लिए बाहरी कारण नहीं, अपनी संकीर्णता की दीवारें उनके लिए उत्तरदायी हैं।
विज्ञापन


परिस्थितिवश कोई समस्या या कठिनाई उत्पन्न हो जाय, तो उसके लिए भी शोध करना आवश्यक नहीं है। परमात्मा ने अंधकार को दूर भगाने की तरह मनुष्य को उन समस्याओं तथा कठिनाइयों को सुलझाने की क्षमता दे रखी है। वह उस क्षमता का उपयोग कर अपने लिए सुख तथा आनन्द का मार्ग खोज सकता है तथा दुःख रुपी अंधकार को दूर हटा सकता है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें