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Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी पर कैसे भगवान विष्णु का अभिषेक ? जानिए सरल पूजा विधि और महत्व

Thu, 09 Jul 2026 02:59 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। एकादशी पर भगवान विष्णु की पंचामृत से अभिषेक करने की विशेष मान्यता है।
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योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 10 जुलाई 2026 को है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा-आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा एकादशी पर भगवान विष्णु का विशेष अभिषेक का खास महत्व होता है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी पर कैसे और किस विधि से अभिषेक करना लाभकारी होता है।

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योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु का अभिषेक
- एकादशी के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। 
- योगिनी एकादशी पर घर पर पंचामृत तैयार करें भगवान विष्णु के पूजन के दौरान इस पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। 
- पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करने के बाद उनको स्वच्छ जल और गंगाजल से अभिषेक करके चंदन और माला फूल अर्पित करें। 
- अभिषेक करने के बाद भगवान विष्णु का श्रृंगार करें जिसमें उनको पीले रंग के वस्त्र, चंदन, रोली और पीले रंग अर्पित करें। 
- अंत में भगवान विष्णु को भोग में पीली मिठाई अर्पित करें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि भोग में तुलसी दल को जरूर शामिल करें। 

एकादशी पर पूजा का फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना और अभिषेक करने से व्यक्ति को सभी तरह के फलों की प्राप्ति होती है।  एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा से सभी तरह के सुखों की प्राप्ति और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। इससे जीवन में मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
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एकादशी पूजन का महत्व
एकादशी पर ब्रह्रा मुहूर्त में पूजन का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में ब्रह्रा मुहूर्त में पूजा करने का विशेष महत्व होता है। ब्रह्रा मुहूर्त का समय सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले का समय होता है। जो सुबह 4 बजे से लेकर बजकर 30 मिनट तक होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्रा मुहूर्त में किया जाने वाला पूजा पाठ बहुत ही फलदायी होता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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