आपने देखा होगा कि जागरण हो या कोई भी शुभ अवसर लोग पूजा-पाठ करवाने के बाद अंत में भंडारा करवाते हैं। भंडारे में लोग अपनी श्रद्घा और क्षमता के अनुसार भोजन बांटते हैं।
अमीर-गरीब हर कोई भंडारे के भोजन को प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि लोग भंडारा क्यों करवाते हैं। आखिर इसके पीछे क्या कारण और उद्देश्य है।
पं. जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि भंडारे की परंपरा भारत में प्राचीन काल से चली आ रही है। हालांकि अब इसका स्वरुप बदल गया है। प्राचीन काल में यह अन्नदान के रुप में जाना जाता है।
अन्नदान का उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में कई स्थानों पर किया गया है। राजे-महाराजे यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान करवाते रहते थे। इनमें गरीबों और जरुरतमंदों को भोजन और वस्त्र बांटा करते थे। आज वही परंपरा भंडारे के रुप में विकसित हो गई।