बुधवार के दिन भगवान गणेश को क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा
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इसके बाद सभी देवों की प्रार्थना पर गणेश जी ने अनलासुर को निगल लिया, तब उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। इस परेशानी से निपटने के लिए कई प्रकार के उपाय किए गए, लेकिन उपाय कारगर नहीं हुआ। उसी समय कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर श्रीगणेशजी को खाने को दीं। जैसे ही गणेशजी ने दूर्वा को ग्रहण किया, तुरंत उनके पेट की जलन शांत हो गई और उसी समय से गणेश जी पर दूर्वा चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई।