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पराई स्त्रियों को देखने में आखिर बुराई क्या है?

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पराई स्त्रियों को देखना शास्त्रों में महापाप बताया गया है। गरुड़ पुराण कहता है कि जो पराई स्त्रियों में रुचि लेता है उसे नर्क में घोर यातना और कष्ट भोगना पड़ता है।
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इसलिए परस्त्रियों से जितना हो सके दूर ही रहें और उनसे निकटता नहीं बढ़ाएं। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर पराई स्त्रियों को देखने में क्या बुराई है।

ईश्वर ने आपको आंखें दी हैं और आप इनसे दुनिया भर की चीजों को देख सकते हैं। फिर ऐसा क्या है कि पराई स्त्रियों को देखने से आंखों को रोका जाए और कहा जाए कि इन्हें मत देखो पाप लग जाएगा।

वास्वत में पराई स्त्रियों को देखने में बुराई कुछ नहीं है आप उन्हें देख सकते हैं और इसमें आपको कोई पाप भी नहीं लगेगा। असल में इसे पाप कहने का कारण कुछ और ही है।
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पाप नहीं कुछ और ही है कारण

शास्त्रों में कहा गया है कि पराई स्त्रियों को माता, बहन और देवी के रुप में देखें तो कोई बुराई नहीं है। आप इस रुप में जितना चाहें उन्हें देख सकते हैं लेकिन दिक्कत यह है कि कई बार हम अपने मन और भावनाओं की लहर में इस तरह बहने लगते हैं कि काम भावना हावी होने लगता है।

यानी दिक्कत देखने में नहीं भावनाओं में है। अगर आप अपनी भावनाओं और मन पर नियंत्रण रखने में सफल होते हैं तब तो कहीं दिक्कत नहीं है। लेकिन कबीर दास जी ने कहा कि 'पर नारी पैनी छुरी, विरला बांचै कोय' यानी पराई स्त्री पैनी छुरी के समान है जिससे शायद ही कोई बच पाता है। इसलिए इनसे दूर ही रहने में भलाई है।

कबीरदास जी यह भी कहते हैं कि पराई स्त्रियों से संर्पक बढ़ने पर आप लाख बचें दुनिया को इसकी खबर हो जाती है यह उसी प्रकार है जैसे कोई लहसुन खाकर उसके गंध को छुपा नहीं सकता है 'पर नारी का राचना, ज्यूं लहसुन की खान।'

दुनिया को आपके परस्त्री संबंध के विषय में जैसे ही जानकारी होती है आपका मान-सम्मान और आदर कम हो जाता है। लोग आपको अविश्वास की नजर से देखने लगते हैं। इसलिए कहा जाता है कि परस्त्रियों को देखने तक से दूर रहना चाहिए।
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