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Moon Black Spot: चंद्रमा को क्यों और किसने दिया श्राप, दाग लगने का क्या है रहस्य?

Wed, 23 Aug 2023 11:35 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रजापति दक्ष ने क्यों दिया चंद्रदेव को श्राप - फोटो : Amarujala
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Moon Black Spot story: हिंदू धर्म में चंद्रमा का अधिक महत्व है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। खास बात ये है कि, हमारी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को शुभ माना जाता है। क्या आप जानते है हिंदू धर्म में कई त्योहार ऐसे हैं, जो चंद्रमा के बिना पूरे नहीं माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा की कृपा से माता का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इसके अलावा अच्छा जीवनसाथी प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को विशेष स्थान प्राप्त है। इसे ग्रह और देव दोनों माना गया है। हालांकि, इसकी उत्पत्ति को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन क्या आप जानते है, चंद्र देवता को भी श्राप मिला हुआ है। आइए जानते हैं, किसने और कब चंद्र देवता को श्राप दिया था। साथ ही चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में भी जान लेते हैं। 

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27 कन्याओं से हुआ चंद्रमा का विवाह
पुराणों के मुताबिक, चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। जिनका नाम रोहिणी, रेवती, श्रावण, सर्विष्ठ, सताभिषक, प्रोष्ठपदस, अश्वयुज, कृतिका, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, मेघा, स्वाति, चित्रा, फाल्गुनी, हस्ता, राधा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूला, सुन्निता, पुष्य अश्व्लेशा, अषाढ़, अभिजीत और भरणी हैं। 

इस वजह से लगा श्राप
कथा के अनुसार, राजा दक्ष की 27 पुत्रियां थीं और उन्होंने सभी का विवाह चंद्रमा से किया था। इस दौरान राजा दक्ष ने यह शर्त रखी थी कि, चंद्रमा अपनी सभी 27 पत्नियों के साथ समान व्यवहार करेंगे। हालांकि, वह रोहिणी के सबसे करीब थे। इस बात से दुखी होकर बाकी कन्याओं ने अपने पिता राजा दक्ष से शिकायत की। जिसके बाद दक्ष ने चंद्रमा को श्राप दिया। जिससे वह क्षय रोग से ग्रसित हो गए। यहीं नहीं चंद्रमा की सभी कलाएं भी समाप्त हो गईं।
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ऐसे हुई चंद्रमा की उत्पत्ति
अग्नि पुराण की माने तो, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी तो सबसे पहले मानस पुत्रों को बनाया था। जिसमें से एक मानस पुत्र ऋषि अत्रि का विवाह ऋषि कर्दम की कन्या अनुसुइया से हुआ था। और चंद्रमा उन्हीं की संतान हैं। वहीं पद्म पुराण की माने तो, ब्रह्मा ने अपने मानस पुत्र अत्रि को सृष्टि का विस्तार करने की आज्ञा दी थी। उनकी आज्ञा पाकर महर्षि अत्रि ने एक तप प्रारंभ किया। तप काल में एक दिन महर्षि की आंखो से जल की कुछ बूंदें गिरी जो काफी प्रकाशमय थी। तब दिशाओं ने स्त्री रूप में आ कर पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उन बूंदों को ग्रहण कर लिया। लेकिन उन बूंदो को दिशाएं धारण न कर सकी और उन्हें त्याग दिया। उस त्यागे हुए गर्भ को ब्रह्मा ने चंद्रमा के नाम से प्रख्यात किया।
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