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जानिए किस उंगली से किसका करें तिलक, इस बारे में क्या कहते हैं शास्त्र

Sat, 13 Jul 2024 11:53 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

मध्यमा उंगली हाथ की सबसे बड़ी उंगली होती है।  इस उंगली का संबंध शनि ग्रह से बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, मध्यमा उंगली का प्रयोग खुद को तिलक लगाने के लिए करना चाहिए। जब प्रतिदिन आप पूजा करें तो अनामिका से भगवान को तिलक लगाने के बाद मध्यमा उंगली से खुद को तिलक कर सकते हैं।
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माथे पर तिलक करने की क्या है विधि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सनातन परंपरा के अनुसार तिलक लगाना सम्मान और गौरव का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि माथे पर तिलक लगाने से व्यक्ति के दिल और दिमाग में सकारात्मकता के भाव आते हैं और कुंडली में मौजूद उग्र ग्रह भी शांत होते हैं। तिलक लगाने से जीवन में यश बढ़ता है और पापों का नाश होता है। साथ ही, जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इससे मन में अच्छे विचार आते हैं और किसी भी काम को करने की क्षमता को हम कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। मान्यता के अनुसार मस्तक पर तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है और सेहत अच्छी बनी रहती है। 
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किस उद्देश्य के लिए किस उंगली से करें तिलक
स्कंदपुराण में बताया गया है कि अलग-अलग उंगली से तिलक लगाने का फल अलग-अलग प्राप्त होता है।

अनामिका शांतिदा प्रोक्ता मध्यमायुष्करी भवेत्।
अंगुष्ठः पुष्टिदः प्रोक्ता तर्जनी मोक्षदायिनी।।


कनिष्ठा उंगली
कनिष्ठा यानी सबसे छोटी उंगली जिसका उपयोग तिलक लगाने में नहीं किया जाता है, यहां तक कि किसी भी शुभ कार्य में इस उंगली का प्रयोग वर्जित बताया गया है। इस उंगली का संबंध बुध ग्रह से माना गया है।

अनामिका उंगली
यह उंगली कनिष्ठा तथा मध्यमा के बीच में होती है, जिसे आम भाषा में रिंग फिंगर भी कहा जाता है। यह हाथ की तीसरी उंगली होती है। इस उंगली से भगवान, गुरु या किसी अन्य व्यक्ति की मंगल कामना के लिए तिलक करना चाहिए।  यह मानसिक शक्ति को प्रबल बनाता है, क्योंकि इस उंगली का संबंध सीधा सूर्य से होता है। इस उंगली से तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है।
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मध्यमा उंगली से तिलक
मध्यमा उंगली हाथ की सबसे बड़ी उंगली होती है।  इस उंगली का संबंध शनि ग्रह से बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, मध्यमा उंगली का प्रयोग खुद को तिलक लगाने के लिए करना चाहिए। जब प्रतिदिन आप पूजा करें तो अनामिका से भगवान को तिलक लगाने के बाद मध्यमा उंगली से खुद को तिलक कर सकते हैं।

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तर्जनी अंगुली से तिलक
यह अंगूठे और मध्यमा उंगली के बीच की उंगली होती है। कहा जाता है कि इस उंगली का प्रयोग केवल मृत व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए किया जाता है, ताकि मृतक की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो, इस उंगली से पितृगणों को अर्थात पिंड को तिलक किया जाता है। इस उंगली का संबंध गुरु ग्रह से होता है।

अंगूठे से तिलक लगाना
अंगूठे का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और शुक्र ग्रह यश और धन-वैभव के कारक माने जाते हैं। दशहरा और रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर बहनें अपने भाई की विजय की कामना करते हुए उन्हें अंगूठे से ही तिलक लगाती हैं। पहले भी जब राजा युद्ध पर जाते थे तो रानियां अंगूठे से ही राजा के मस्तक पर विजय तिलक करती थीं। किसी की मंगल कामना के लिए अनामिका से बिंदी लगाकर अंगूठे से तिलक करना चाहिए।  
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