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Havan: एक यंत्रात्मक क्रिया है हवन, जानें जीवन में इसका महत्व

Fri, 20 Sep 2024 04:06 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जिस घर में नियमित हवन होता है, वहां अकाल मृत्यु, पितृ दोष, ग्रह पीड़ा, प्रेत पीड़ा, धनाभाव और असाध्य रोग न के बराबर होते हैं।
 
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जीवन में हवन की शक्ति - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राज किशोर सहाय

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भारतीय संस्कृति में यज्ञ और हवन ऋषि-मुनियों की ओर से जगत को दी गई एक ऐसी अनुपम देन है, जिसे सर्वाधिक फलदायी एवं समस्त पर्यावरण केंद्र 'इको सिस्टम' के दुरुस्त बने रहने का आधार माना जा सकता है। अथर्ववेद में 'अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः' कहकर यज्ञ और हवन को संसार की सृष्टि का आधार बिंदु कहा गया है। आमतौर पर किसी कुंड में जलती लकड़ी पर पंडित द्वारा उच्चारित मंत्र के अंत में स्वाहा बोलते ही पूजन सामग्री को कुंड में डालने को हवन कहा जाता है, लेकिन हवन इससे कहीं अधिक है।

प्रतीकात्मक हवन को छोड़ दें तो दुनिया में हर प्राणी हर पल एक हवन निरंतर करता रहता है। यह हवन है शरीर के अंदर जलने वाली अग्नि, जिसको जठराग्नि के नाम से जाना जाता है। इसमें प्राण वायु के माध्यम से इसको दीप्तिमान रखा जाता है। इसी में आहुतियां डाली जाती हैं, इसलिए योग और आयुर्वेद में नाभि तक ली जाने वाली सांस को पूर्ण श्वास कहा जाता है, जिससे यह अग्नि अच्छी तरह प्रदीप्तमान रहती है। यही अग्नि 'योगी का तेज' रूप में परिभाषित होती है।
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हानिकारक जीवाणुओं का अंत 
प्रकृति में भी एक हवन चलता रहता है, जो इसको क्रियान्वित रखने की ऊर्जा प्रदान करता है। हवन यज्ञ का मुख्य घटक है अग्नि। यह अग्नि सत्य, प्रकाश, शाश्वत, सनातन का प्रतीक है और यही सनातन धर्म का केंद्र भी है। इसीलिए सनातन धर्म में कोई भी कार्य बिना अग्नि के पूरा नहीं होता। इसी आधार का प्रयोग यज्ञ, हवन आदि में किया जाता है।

हवन में लकड़ी, गाय के दूध का घी और अनेक जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाई गई हवन सामग्री का प्रयोग होता है। हवन आस-पास के 20 मीटर के क्षेत्रफल के प्रदूषण स्तर में 70 प्रतिशत तक कमी लाता है। इससे 'फॉर्मिक एल्डिहाइड' जैसी गैसों का उत्सर्जन होता है, जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।

कुंड का आकार एक यंत्र है 
हवन एक प्रकार की यंत्रात्मक क्रिया है, जो हवनकर्ता को उस आयाम से जोड़ती है, जिससे वह संपर्क करना चाहता है। ब्रह्मांड में कुल 10 आयाम हैं, जिनको तंत्र में दस महाविद्या के रूप में प्रकट किया गया है। इनसे संपर्क करने का सबसे सरल माध्यम है हवन यज्ञ, क्योंकि यह यंत्र के माध्यम से संपन्न होने वाली क्रिया है। कुंड का आकार एक यंत्र है, जिसमें आह्वान के बाद मंत्रों से आहुतियां दी जाती हैं। जब स्वाहा बोला जाता है, तब कुंड की अग्नि अपना मुख खोलती है, जिसमें हवन सामग्री डाली जाती है, जो आह्वान किए गए आयाम को जाती है। उसी आयाम से ऊर्जा उतरती है और सीधी कुंड में गिरती है और चारों तरफ फैल जाती है। यह ऊर्जा संपर्क में आने वाली हर चीज पर प्रभाव डालकर उसको ऊर्जान्वित करती है। इसी से अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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