'डार्क इज़ डिवाइन' प्रोजेक्ट के लिए भारद्वाज सुंदर और नरेश नील ने सांवले रंग वाले पुरुष और महिला मॉडलों को चुना। उन्हें देवी-देवताओं की तरह कपड़े पहनाए गए और दिसंबर में दो दिनों तक इसकी शूटिंग की गई और इसके नतीजे चौंकाने वाले रहे। मॉडल सुरुथी पेरियासामी ने बीबीसी को बताया कि अतीत में उन्हें कई बार सिर्फ इसलिए खारिज किया गया क्योंकि सांवले रंग की मॉडल किसी को भी नहीं चाहिए थी।सुरुथी पेरियासामी उस वक्त रोमांचित हो गईं जब उन्हें धन की देवी लक्ष्मी के रूप में दिखाने के लिए चुना गया।
सुरुथी पेरियासामी कहती हैं, "लक्ष्मी भारत में सबसे लोकप्रिय देवियों में से एक हैं। हर कोई उनके जैसी बहू चाहता है क्योंकि वे समृद्धि लाती हैं. उनके जैसी दिखकर मैं खुद को धन्य समझती हूं." "हर कोई सांवले रंग की मॉडल के साथ काम करने की बात करता है, लेकिन हक़ीक़त में कोई उन्हें उत्साहित नहीं करता है। मुझे उम्मीद है कि इस कैंपेन से लोगों की सोच बदलेगी और हमें भी ज़िंदगी में कुछ कर दिखाने का मौका मिलेगा" दिसंबर में शुरू हुए इस कैंपेन पर भारद्वाज सुंदर बताते हैं कि उन्हें काफी सारी प्रतिक्रियाएं मिली हैं जो ज़्यादातर सकारात्मक हैं। हालांकि कुछ लोगों ने उन पर पक्षपातपूर्ण अवधारणा के साथ काम करने का आरोप भी लगाया। लोगों ने भारद्वाज सुंदर को ये ध्यान दिलाया कि देवी काली को हमेशा ही काले रंग में दिखलाया गया है।
भारद्वाज सुंदर कहते हैं कि वे एक धर्मपरायण हिंदू हैं और उनके 'डार्क इज़ डिवाइन' प्रोजेक्ट का मक़सद किसी को आहत करना नहीं है। वे कहते हैं, अगर हम अपने आस-पास देखें तो हम पाते हैं कि 99.99 फीसदी मौकों पर देवी-देवता की तस्वीर गोरे रंग वाली ही होती है. हम किसी के बारे में कैसी राय बनाते हैं हैं, ख़ासकर महिलाओं के बारे में, इसमें उसके रूप-रंग की बड़ी भूमिका रहती है. मुझे लगा कि इस पहलू की तरफ़ ध्यान दिलाने की ज़रूरत है।