कीनिया के एक पादरी ने कहा कि महिलाओं को अंतःवस्त्र धारण करके चर्च में नहीं आना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने यह तर्क दिया है कि इससे महिलाएं खुद को पूरी तरह स्वतंत्र महसूस नहीं कर पाती हैं।
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तब महिलाएं सिर्फ साड़ी क्यों पहनती हैं
हिन्दू धर्म में भी कहा गया है कि धार्मिक अनुष्ठान और पूजा करते समय सिले हुए कपड़े नहीं धारण करना चाहिए। इसके पीछे यह मान्यता है कि सिले हुए कपड़े शुद्घ नहीं होते। इन वस्त्रों से बंधन का एहसास बना रहता है और पूरी तरह ध्यान केन्द्रित नहीं हो पाता है।
यही कारण है कि आपने देखा होगा कि विशेष पूजा और अनुष्ठान के समय पुरुष धोती और महिलाएं सिर्फ साड़ी पहनकर पूजन किया करती हैं। यह दोनों ही वस्त्र सिले हुए नहीं होते हैं।
इस्लाम में भी यह नियम है कि जो हज यात्री मक्का में इबादत करने आते हैं। उन्हें ईबादत से पहले सफेद और बिना सिला हुआ कपड़ा पहनना होता है। इस कपड़े को आदर देने के लिए 'एहराम' नाम से पुकारा जाता है।