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Guruvar Aarti: भगवान विष्णु के साथ करें बृहस्पति देव की आरती, मिलेगा मनचाहा फल

Thu, 16 May 2024 09:34 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Aarti Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। दिन की शुरुआत पूजा करने से की जाए, तो इसे बेहद शुभ माना जाता है। इससे मानसिक तनाव में कमी आती है।
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Vishnu Ji And Brihapati Dev Aarti - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Vishnu Ji And Brihaspati Dev Aarti Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। दिन की शुरुआत पूजा करने से की जाए, तो इसे बेहद शुभ माना जाता है। इससे मानसिक तनाव में कमी आती है। साथ ही विधिनुसार पूजा-पाठ करने से व्यक्ति के रूके हुए कार्य भी पूर्ण होते हैं। वहीं सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित है। इसलिए हर दिन पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न रहते हैं। इसके अलावा गुरुवार के दिन का अपना अलग महत्व है। यह दिन श्री हरी और भगवान बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन विष्णु जी का व्रत रखते हैं। इस दौरान देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इस दिन उपवास रखना चाहिए। गुरुवार के दिन पूजा विधि के साथ-साथ आरती का भी खास ध्यान रखें। माना जाता है कि इस दिन श्री हरि विष्णु की आरती के बाद बृहस्पति देव की आरती करना शुभ होता है। इससे कुंडली में ग्रहों की दशा ठीक होती है। 

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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

बृहस्पति देव की आरती

ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा। 
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। 
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

श्री बृहस्पतिवार की आरती- ॐ जय बृहस्पति देवा-

ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
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