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Vikram Samvat 2077: 25 मार्च से हिन्दू नववर्ष प्रारंभ, जानें इसका महत्व और इतिहास

Sat, 21 Mar 2020 08:12 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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vikram samvat 2077 - फोटो : vikram samvat 2077
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25 मार्च से हिन्दू नववर्ष 2077 की शुरुआत होगी। आधिकारिक रूप से इसे विक्रम संवत 2077 कहा जाएगा। आम भाषा में इसे हिन्दू पंचांग के नाम से भी जाना जाता है। विक्रम संवत अत्यंत प्राचीन और पूर्ण रूप से वैज्ञानिक है। प्रति वर्ष विक्रम संवत का नया साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही की थी। आइए जानते हैं इस विक्रम संवंत वैज्ञानिक आधार और इतिहास क्या है?

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सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी - फोटो : AmarUjala
विक्रम संवत का धार्मिक महत्व
वैदिक शास्त्रों और पुराणों के अनुसार सृष्टि के निर्माता भगवान ब्रह्मा जी ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को इस संसार को रचा था, इसलिए इस पावन तिथि को 'नव संवत्सर' पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। नवरात्रि व्रत भी इसी तिथि से प्रारंभ होता है। 

हिन्दू पंचांग
विक्रम संवत है पूर्ण रूप से वैज्ञानिक
विक्रम संवंत सबसे अधिक प्रासंगिक, सार्वभौमिक और वैज्ञानिक कैलेंडर है। यह सौर्य और चंद्रमा की गणना पर आधारित है। हिंदू पंचांग की गणना के आधार पर यह हजारों साल पहले बता दिया था कि अमुक दिन, अमुक समय पर सूर्यग्रहण होगा। युगों बाद भी यह गणना सही और सटीक साबित हो रही है।

calendar 2020 - फोटो : calendar 2020
12 हिन्दू माह के नाम
  1. चैत्र
  2. वैशाख
  3. ज्येष्ठ
  4. आषाढ़
  5. श्रावण
  6. भाद्रपद
  7. अश्विन
  8. कार्तिक
  9. मार्गशीर्ष
  10. पौष
  11. माघ
  12. फाल्गुन

शीत ऋतु - फोटो : अमर उजाला
पक्ष
एक माह में दो पक्ष होते हैं- 
  1. शुक्ल पक्ष
  2. कृष्ण पक्ष
तिथियां
एक पक्ष में पंद्रह तिथियां होती हैं। जहां शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहते हैं। पंद्रह तिथियों के नाम -
  1. प्रतिपदा
  2. द्वितीय
  3. तृतीया
  4. चतुर्थी
  5. पंचमी
  6. षष्ठी
  7. सप्तमी
  8. अष्टमी
  9. नवमी
  10. दशमी
  11. एकादशी
  12. द्वादशी
  13. त्रयोदशी
  14. चतुर्दशी
  15. अमावस्या/पूर्णिमा 
छह ऋतुओं के नाम
हिन्दू वर्ष वर्ष के मुताबिक भारत में एक वर्ष के अंतर्गत छह ऋतुएं आती हैं ये छह ऋतु इस प्रकार हैं..
  1. वसन्त    
  2. ग्रीष्म  
  3. वर्षा    
  4. शरद    
  5. हेमन्त    
  6. शिशिर
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सूर्य देव
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के जिस दिन (वार) से विक्रमी संवत शुरू होता है, वही इस संवत का राजा होता है। सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करता है, तो वह संवत का मंत्री होता है। विक्रम संवत समस्त संस्कारों, पर्वों एवं त्योहारों की रीढ़ माना जाता है। समस्त शुभ कार्य इसी पंचांग की तिथि से ही किए जाते हैं। यहां तक की वित्तीय वर्ष भी हिन्दू नववर्ष से प्रारंभ होता है और समाप्त भी इसी के साथ होता है।
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