चावल का सेवन न करें
एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति आज के दिन जावल का सेवन करता है उसे अगले जन्म रेंगने वाले प्राणी के रूप में जन्म मिलता है। इसलिए आज के दिन चावल न खाएं। वहीं इसके विपरीत द्वादशी के दिन चावल खाने से इस योनि से मुक्ति मिल जाती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना मांस के सेवन करने के समान माना गया है। हालांकि इसके पीछे वैज्ञानिक तथ्य ये है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति के शरीर में जल की मात्रा बढ़ जाती है और जल का कारक चंद्रमा है जो मन को प्रभावित करता है।
मांस-मछली एवं मदिरापान से रहें दूर
एकादशी तिथि के दिन मांस-मछली और मदिरापान से परहेज करना चाहिए। बल्कि जो व्यक्ति व्रत रखने जा रहा है तो उसे दशमी तिथि के दिन भी इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही लहसुन, प्याज, गाजर, मूली, शलजम, गोभी, पालक एवं मसूर की दाल का सेवन भी न करें।
बह्मचर्य का पालन करें
एकादशी के दिन और दशमी तिथि की रात्रि में शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। इस व्रत के लिए व्रती को पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।
किसी निंदा न करें
वैसे तो किसी भी किसी व्यक्ति की निंदा नहीं करनी चाहिए। परंतु विशेष रूप से एकादशी तिथि के दिन तो व्रत रखने वाले व्यक्ति को यह कार्य नहीं करना चाहिए। किसी के प्रति अपशब्द न बोलें।
दांतून न करें
एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को आज के दिन दातून नहीं करना चाहिए। इसके अलावा आज के दिन किसी पेड़ की टहनी से पत्ता न तोड़ें।
क्रोध न करें
क्रोध में व्यक्ति अपना आपा खो देता है और गलत कार्य कर जाता है। इसलिए एकादशी के दिन व्यक्ति को सौम्य रहना चाहिए।