फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vaishakh Amavasya 2025: वैशाख अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण के साथ पढ़ें यह विशेष स्रोत, पितृदोष से मिलेगी राहत

Thu, 17 Apr 2025 06:08 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vaishakh Amavasya: वैशाख माह की अमावस्या को पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके पूर्वजों को जल अर्पित करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। 
विज्ञापन
पितृ दोष निवारण स्तोत्र - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Pitra Dosh Nivaran Stotra: हिंदू धर्म में जैसे पूर्णिमा का विशेष महत्व है, वैसे ही अमावस्या भी अत्यंत पावन मानी जाती है। खासतौर पर वैशाख माह की अमावस्या को पितृ तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके पूर्वजों को जल अर्पित करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद बरसाते हैं। अगर आप भी पितृदोष से मुक्ति पाना चाहते हैं या पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो इस दिन तर्पण, पिंडदान और पितृ शांति मंत्रों का जप करें।

Shadashatak Yoga: 18 साल बाद राहु और मंगल का षडाष्टक योग, इन 3 राशियों के लिए लाएगा चुनौतियां
विज्ञापन

विज्ञापन

पितृ दोष निवारण स्तोत्र - फोटो : adobe stock
वैशाख अमावस्या  तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या तिथि की शुरुआत 27 अप्रैल 2025 को प्रातः 4:49 बजे होगी और इसका समापन 28 अप्रैल को रात्रि 1:00 बजे होगा। ऐसे में अमावस्या का व्रत 27 अप्रैल को करना श्रेष्ठ रहेगा। इस पावन अवसर पर गंगा स्नान, दान-पुण्य, और ध्यान-भजन का भी विशेष महत्व है। यह दिन आत्मिक शुद्धि और पितृ कृपा प्राप्त करने का एक सुंदर अवसर होता है।

पितृ दोष निवारण स्तोत्र - फोटो : amar ujala
पितृ निवारण स्तोत्र
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।
विज्ञापन

पितृ दोष निवारण स्तोत्र - फोटो : amar ujala
पितृ कवच
कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।
तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥

तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।
तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥

प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।
यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥

उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।
यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥

ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।
अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें