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Guruwar Upay: गुरुवार के दिन करें ये खास उपाय, विवाह संबंधी परेशानियां होंगी दूर

Wed, 16 Apr 2025 05:03 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Guruwar Upay: गुरुवार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का अवसर है। इस दिन की गई उपासना से न केवल सभी मनोकामनाएं पूर्ण, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि का वास भी होता है।
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गुरुवार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का अवसर है। इस दिन की गई उपासना से न केवल सभी मनोकामनाएं पूर्ण, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि का वास भी होता है। - फोटो : freepik
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विस्तार
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Guruwar Upay: गुरुवार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का अवसर है। इस दिन की गई उपासना से न केवल सभी मनोकामनाएं पूर्ण, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि का वास भी होता है। मान्यता है कि यदि गुरुवार के दिन सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु को केवल केले का भोग लगाया जाए, तो व्यक्ति के सभी संकटों का निवारण होता है।

वहीं ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार को बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है। इस दिन की गई पूजा-अर्चना व दान-दक्षिणा देने से कुंड़ली में गुरु की स्थिति मजबूत होती हैं। कहते हैं कि देव गुरु बृहस्पति ज्ञान, धन, संतान और विवाह के कारक है। उनके प्रभाव से विवाह संबधी समस्या दूर होती है और वैवाहिक सुख के योग बनते हैं।

 

यदि आपकी शादी-विवाह में बार-बार कोई बाधा आ रही है या वैवाहिक जीवन में तनाव रहता है, तो गुरुवार के दिन बृहस्पति देव की आरती करें। इससे सभी समस्याएं दूर होती हैं और भाग्य भी चमकने लगता है। ऐसे में आइए इस आरती के बारे में जानते हैं

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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

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बृहस्पति देव की आरती

ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा। 
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। 
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

श्री बृहस्पतिवार की आरती- ॐ जय बृहस्पति देवा-

ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
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