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ऐसे शुरू हुआ एकादशी व्रत

Sat, 08 Dec 2012 05:47 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
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एकादशी व्रत के बारे में आप जानते ही होंगे। हर महीने में दो एकादशी होती है- एक कृष्ण पक्ष की एकादशी और दूसरी शुक्ल पक्ष की एकादशी। लेकिन हो सकता है कि आप यह नहीं जानते हों कि एकादशी व्रत की शुरुआत कैसे हुई। एकादशी की शुरुआत के विषय में पुराणों में जो कथा मिलती है उसके अनुसार मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी का जन्म हुआ। इसलिए मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है।
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मुर नामक असुर से युद्घ करते हुए जब भगवान विष्णु थक गए तब बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। मुर भगवान विष्णु का पीछा करता हुए बद्रीकाश्रम पहुंच गया। निद्रा में लीन भगवान को मुर ने मारना चाहा तभी विष्णु भगवान के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और इस देवी ने मुर का वध कर दिया।

देवी के कार्य से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने कहा कि देवी तुम्हारा जन्म मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। आज से प्रत्येक एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी। जो भक्त एकादशी का व्रत रखेगा वह पापों से मुक्त हो जाएगा।
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मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को एकादशी देवी का अवतार हुआ था इसलिए सभी एकादशी में इसका बड़ा महत्व है। एकादशी देवी विष्णु की माया से प्रकट हुई थी। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्घा भाव से उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखता वह मोहमाया के प्रभाव से मुक्त हो जाता है, छल-कपट की भावना उसमें कम हो जाती है और अपने पुण्य के प्रभाव से व्यक्ति विष्णु लोक में स्थान पाने योग्य बन जाता है।  

इस वर्ष यह एकादशी 9 दिसम्बर को है। जो लोग यह व्रत करना चाहते हैं उन्हें एकादशी के दिन प्रातः उठकर भगवान विष्णु एवं देवी एकादशी की पूजा करनी चाहिए। पूरे दिन निराहार रहकर संध्या पूजन के बाद फलाहार चाहिए। परनिंदा, छल-कपट, लालच, द्वेष से भावना मन में न लाएं। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाने के पश्चात स्वयं भोजन करें।
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