गाय का अपमान
इस प्राकृतिक संरचना में गाय को न सिर्फ मनुष्य ने अपितु देवताओं ने भी विशेष दर्जा दिया है। पुराणों में गाय को नंदा, सुनंदा, सुरभि, सुशीला और सुमन भी कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि कृष्ण कथा में अंकित सभी पात्र किसी न किसी कारणवश शापग्रस्त होकर जन्में थे।
गाय को कामधेनु तथा गौ माता भी माना है। गाय मनुष्य को दूध, दही, घी, गोबर-गोमूत्र के रूप में पंचगव्य प्रदान करती है। सृष्टि की संरचना पंचभूत से हुई है। यह पिंड, यह ब्रहमाण्ड,पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश रूप पंचभूतों के पांच तत्वो से बना है। इन पंचतत्वो का पोषण और इनका शोधन गोवंश से प्राप्त पंच तत्वों से होता है। इसीलिए गाय को पंचभूत की मां कहां गया है।
देवीय पुराण और हिंदू धर्म के सभी शास्त्रों में गाय का अपमान करने वाले की घोर निंदा के पात्र माने गए है। गौमाता का अपमान करना ईशवर की दृष्टि में एक ऐसा पाप है, जिसका मनुष्य जीवन के कोई प्रायश्चित्त नहीं है। जो पुण्य तीर्थ दर्शन करके या यज्ञ करके बटोरा जाता है, वहीं सारा पुण्य केवल गौमाता की सेवा करने से ही प्राप्त हो जाता है।