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रावण के पास थी चमत्कारी शक्तियां, एक कमजोरी न होती तो बन सकता था देवलोक का स्वामी

Fri, 08 Mar 2019 01:00 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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ravan
मन में रावण का नाम आते ही एक नकारात्मक छवि सामने आने लगती है लेकिन साथ ही रावण के अनेक गुणों के कारण विद्वान और प्रकांड पंडित की भी एक सुंदर छवि उभरती है। रावण के तमाम अवगुणों के बाद उसके पास तमाम तरह की शक्तियां थी जिसके बल से उसके अंदर देवलोक के स्वामी की बनने की क्षमता थी। आइए जानते हैं रावण की खूबियां...
 
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ravan - फोटो : ravan
तेज और प्रखर बुद्धि रावण
रावण के बारे में कहा जाता है उसके जैसा ज्ञानी और तेज दिमाग वाला इंसान पृथ्वी पर आज तक नहीं पैदा हुआ। ऐसी मान्यता है कि है कि रावण के दस सिर थे जिसके पीछे रावण के तेज दिमाग का तर्क दिया जाता था। दरअसल रावण के पास 10 दिमागों के बराबर उसके पास बुद्धि और कौशल था जिसकी बदौलत उसके अंदर  बड़े- बड़े फैसले करने की क्षमता उसके अंदर थी।
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ravan - फोटो : ravan
हनुमान जी भी हुए रावण की शक्ति के कायल
माता सीता की खोज में लंका पहुंचे भगवान हनुमान रावण से मिलकर बहुत प्रभावित हुए। रावण के बारे उन्होंने कहा कि कहा कि सर्वगुणों से युक्त यह वीर पुरूष है और इसके अंदर देवलोक के स्वामी बनने की क्षमता है। लेकिन अंहकारी और अर्धमी होने के कारण उसने अपना सबकुछ खो दिया।
 

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शिव तांडव स्त्रोत की थी रचना
रावण के अंदर शक्ति और बुद्धि दोनों बराबर थी। एक बार अपनी शक्ति के अंहकार में वह इतना अंहकारी बन बैठा कि अपने आराध्य देव भगवान शिव की नगरी कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत का भार इतना बढ़ा दिया कि रावण का हाथ उसके नीचे दब गया। इसके बाद रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्त्रोत की रचना कर डाली जिससे भगवान शंकर प्रसन्न होकर उसको आशीर्वाद दे डाला।
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ग्रहों तक को कैद करने की थी क्षमता
रावण के पास गजब की शक्तियां थी उसने न सिर्फ देवताओं का परास्त किया था बल्कि अपने तप के बल से सभी नौ ग्रहों को अपने पक्ष में कर लिया था। रावण ने शनि ग्रह को वर्षों तक अपने महल में कैद कर रखा था। सीता की खोज में  हनुमानजी ने लंका पहुंचने पर शनिदेव को मुक्ति दिलाई थी।
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महान पुरोहित
रावण भगवान शिव का परम भक्त था। वह वास्तुशास्त्र का ज्ञाता और महान पुरोहित भी था। भगवान शंकर ने माता पार्वती के लिए सोने की लंका बनवाने के बाद उसमे गृह प्रवेश के लिए रावण को पुरोहित के लिए चुना था। लेकिन रावण को सोने की लंका इतनी पसंद आई की दक्षिणा स्वरूप भगवान शिव से वही सोने की लंका ही मांग डाली। इसके अलावा जब भगवान राम ने रामेश्वरम में सेतु निर्णाण के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी तब  पूजन के लिए योग्य पुरोहित रावण को ही आमंत्रित किया था। रावण ने यह आग्रह स्वीकार भी कर लिया था।
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रावण ज्योतिष, संगीत, कविता और आयुर्वेद का था जानकार
रावण के अंदर तमाम तरह के अवगुणों के बावजूद वह बहुत बड़ा ज्योतिष, संगीत, कविता और आयुर्वेद का था जानकार भी था। रावण तंत्र-मंत्र में भी सिद्धि प्राप्त कर चुका था।
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राम रावण अंतिम युद्ध
अंत समय में लक्ष्मण को दी थी जीवन की सीख
रावण इतना विद्वान और परम ज्ञानी था कि जब वह अपनी अंतिम सांस गिन रहा था तब भगवान राम ने लक्ष्मण को रावण से सीख लेने के उसके पास भेजा था। रावण ने लक्ष्मण को जीवन की 3 महत्वपूर्ण शिक्षा दी थी।
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