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Puja: जानिए क्या हैं दीपक जलाने के फायदे, इस मंत्र को बोलकर करें दीप प्रज्जवलन बरसेगी सुख-समृद्धि

Sun, 19 Jun 2022 09:27 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
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किसी भी देवी-देवता के पूजन के समय ऊर्जा को केन्द्रीभूत करने के लिए दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है।  
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भारतीय संस्कृति में धार्मिक,सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि अग्निदेव को साक्षी मानकर उसकी उपस्थिति में किया गया कोई भी शुभ कार्य अवश्य सफल होता है।शास्त्रों के अनुसार अग्नि पृथ्वी पर सूर्य का परिवर्तित रूप है, इसलिए किसी भी देवी-देवता के पूजन के समय ऊर्जा को केन्द्रीभूत करने के लिए दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है।  

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दीपक के फायदे
पूजा में घी या तेल के दीपक जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,घर के सदस्यों को यश एवं प्रसिद्धि मिलती है। वास्तु नियमों के अनुसार अखंड दीपक पूजा स्थल के आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए,इस दिशा में दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है। दीप ज्योति से समस्त पाप नष्ट होकर जीवन में सुख-समृद्धि,आयु,आरोग्य एवं सुखमय जीवन में वृद्धि होती। गाय के घी का दीपक जलाने से आसपास का वातावरण रोगाणु मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है। पूजा अर्चना करते वक्त दीपक जलाने के पीछे भी यही उद्देश्य होता है कि प्रभु हमारे मन से अज्ञान रूपी अन्धकार को दूर करके ज्ञान रूपी प्रकाश प्रदान करें। जिन घरों में रोज सुबह-शाम नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है,वहां सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। दीपक के धुएं से वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। दीपक अंधकार और नकारात्मकता को मिटाकर प्रकाश फैलाता है,इसी वजह से घर में सुबह-शाम दीपक का प्रकाश फैलाना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है।

दीपक जलाते समय मंत्र
दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
मंत्र- शुभम करोति कल्याणं,आरोग्यं धन संपदाम्,शत्रु बुद्धि विनाशाय,दीपं ज्योति नमोस्तुते।

इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली,आरोग्य और धन संपदा देने वाली,शत्रु बुद्धि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है।

कैसे और कहां जलाएं दीपक
दीपक जलाते समय उसे कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। दीपक रखने के लिए पहले किसी अन्न जैसे जौ,चावल या गेहूं की ढेरी बना लें उसके ऊपर दीपक रखें। ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। दीपक देवी-देवताओं की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना शुभ माना गया है। ध्यान रखें कि यदि मिटटी का दीप जला रहें हैं तो दीप साफ़ हो और कहीं से टूटे हुए न हो।किसी भी पूजा में टूटा हुआ दीपक अशुभ और वर्जित माना गया है।

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