सनातन धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिन्हें साक्षात ईश्वर की संज्ञा दी गई है। सूर्य की पूजा करने से जीवन में तेज, आरोग्य, आत्मबल, उन्नति और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। वे केवल प्रकाश और ऊर्जा के स्त्रोत नहीं, अपितु समस्त ब्रह्मांड में चेतना और गति के प्रवर्तक हैं। सूर्यदेव की पूजा विशेषकर सप्तमी तिथि, संक्रांति, रविवार और विशेष व्रतों जैसे रथ सप्तमी पर अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धा और विधिपूर्वक सूर्य भगवान की पूजा करता है, उसे न केवल सांसारिक सुख-संपत्ति प्राप्त होती है, अपितु अंत में दिव्य लोकों में भी स्थान मिलता है। सूर्य उपासना से नेत्र संबंधी विकार दूर होते हैं। आरोग्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता, सम्मान और वैभव प्राप्त होता है। भविष्य पुराण के अनुसार तरह-तरह के पुष्पों से सूर्य नारायण का पूजन करने पर इच्छित फल शीघ्र प्राप्त होते हैं।
भगवान सूर्य को प्रिय पुष्प और उनसे मिलने वाले फल
मल्लिका पुष्प (बेला फूल की एक जाति) - यह पुष्प सूर्यदेव को अति प्रिय है। इसे अर्पित करने वाला उत्तम भोगों को प्राप्त करता है।
श्वेत कमल – इसे अर्पण करने से मनुष्य को सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा एक हज़ार कमल पुष्प अर्पित करने वाला सूर्यलोक में निवास करता है।
कुटज पुष्प – यह फूल सूर्यदेव को अर्पित करने से अक्षय ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
मंदार पुष्प – इससे सभी प्रकार के कुष्ठ रोगों का नाश होता है एवं इसकी माला अर्पित करने से सम्पूर्ण कामनाओं की पूर्ती होती है।
बिल्व पत्र – सूर्यदेव का बिल्व पत्र से पूजन करने पर विपुल संपत्ति प्राप्त होती है।
मौलसिरी पुष्प की माला – इस पुष्प की माला अर्पण करने से रूपवती कन्या की प्राप्ति होती है।
पलाश पुष्प – इससे अरिष्ट की शांति होती है।
अगस्त्य पुष्प – सूर्यदेव का अनुग्रह प्राप्त होता है।
करवीर पुष्प – इस पुष्प को अर्पित करने से सूर्यदेव के अनुचर होने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
बेला पुष्प – इस पुष्प को श्रद्धाभाव से भगवान् भास्कर को अर्पित करने वाले मनुष्य को सूर्यलोक की प्राप्ति होती है।
वकुल पुष्प – यह पुष्प सूर्यदेव को अर्पित करने से भानुलोक की प्राप्ति होती है।
करवीर के पुष्प – जो प्राणी करवीर के पुष्पों से सूर्यनारायण की पूजा करता है वह समस्त सांसारिक सुखों को भोगकर अंत में स्वर्गलोक में निवास करता है।
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