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जहां मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के शक्तिशाली असुर का वध किया

Thu, 10 Oct 2013 08:50 AM IST
टीम डिजिटल
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नवरात्र में मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ आपने भैंस के शरीर से निकल रहे एक मानव आकृति को देखा होगा। इसके हाथों में कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्र होते हैं जिनसे यह माता से युद्घ कर रहा होता। इस असुर का नाम महिषासुर है। दुर्गासप्तशती के तीसरे अध्याय में महिषासुर के वध की कथा है। महिषासुर एक शक्तिशाली असुर था इसने अपने बल से देवताओं का साम्राज्य छीन लिया और स्वयं इन्द्र बनकर स्वर्ग पर राज करने लगा।
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देवतागण ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शरण में गए। महिषासुर को वरदान प्राप्त था कि कुंवारी कन्या के हाथों ही उसका वध होगा। इसलिए तीनों देवों ने मिलकर अन्य देवाताओं की सहायता से एक नारी रूप को प्रकट किया और अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।

तस्वीरों में दर्शन कीजिए नैना देवी शक्तिपीठ के

इस देवी ने महिषासुर को युद्घ के लिए ललकारा और रण में महिषासुर का वध किया, इसलिए माता का एक नाम महिषासुरमर्दनी भी है। देवी ने जिस स्थान पर महिषासुर का वध किया था वह स्थान देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह स्थान हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित नैना देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।
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पुराणों की कथा के अनुसार यहां पर देवी सती के नैन गिरे थे। इसलिए यह नैनाशक्ति शक्तिपीठ कहलाया। इस स्थान पर शक्तिपीठ होने की जानकारी सबसे पहले एक गुर्जर लड़के को हुई जो हर दिन यहां गाय चराने आता था। इसने देखा कि एक गाय हर दिन नियम स्थान पर जाकर खड़ी हो जाती है और उसके स्तन से दूध की धारा बहने लगती है।

कई दिनों तक ऐसा ही होता रहा तब नैना देवी गुर्जर लड़के के सपने में आई और बताया कि जहां आकर गाय के स्तन से दूध की धारा बहने लगती है वहां मेरा पिण्ड है। मै नैना देवी हूं। गुर्जर लड़के ने यह बात उस समय के राजा बीरचंद को बताई। लड़के की बात सुनकर महाराजा स्वयं उस स्थान पर गए और अद्भुत नजरा देखकर आत्मविभोर हो गए। राजा बीरचंद ने नैना देवी का मंदिर बनवाया।
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