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दुर्योधन निर्वस्त्र नहीं होता तो कृष्ण को यूं देह त्याग नहीं करना पड़ता

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ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के देह त्याग और यदुवंश के नष्ट होने के पीछे महाभारत की एक घटना है। यह घटना उस समय कि है जब महाभारत का युद्घ अंतिम चरण में चल रहा था। कौरवों की ओर से लड़ रहे सभी वीर अपने प्राण गंवा चुके थे।
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अब यह करीब-करीब तय हो चुका था कि महाभारत के युद्घ में पाण्डव विजयी हो चुके हैं। यह बात दुर्योधन की माता गांधारी के पास भी पहुंची। गांधरी इस युद्घ में अपने 99 पुत्रों को खो चुकी थी और सिर्फ दुर्योधन ही बचा हुआ था।

ऐसे समय में गांधारी का पुत्र मोह उभरकर सामने आ गया और उसने अपने पुत्र दुर्योधन को गंगा स्नान करके नग्न अवस्था में अपने सामने आने के लिए कहा। दुर्योधन माता के सामने नग्न में आने से पहले तो हिचकिचाए लेकिन माता की आज्ञा के कारण दुर्योधन ऐसा करने के लिए तैयार हो गए।
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क्या हुआ जब दुर्योधन माता के कक्ष में पहुंचे

दुर्योधन गंगा स्नान करके नग्न अवस्था में माता के शिविर में प्रवेश करने ही वाले थे कि भगवान श्री कृष्ण वहां पहुंच गए। श्री कृष्ण दुर्योधन को नग्न अवस्था में देखकर पहले तो हंसे फिर दुर्योधन को समझाया कि माता के सामने नग्न जाना उचित नहीं है।

श्री कृष्ण ने सलाह दिया कि कम से कम अपनी कमर में केले का पत्ता लपेट लो। दुर्योधन को श्री कृष्ण की यह बात ठीक लगी और केले का पत्ता लपेटकर वह माता के सामने पहुंच गए।

गांधारी ने अपनी आंखों पर लगी पट्टी को हटाया और दुर्योधन को देखा। गांधारी की दृष्टि से दुर्योधन का पूरा शरीर वज्र का बन गया लेकिन जिस भाग पर केले का पत्ता लपेटा हुआ था वह वज्र का नहीं बन सका।

गांधारी ने जब यह पूछा कि किसने तुम्हें केले का पत्ता लपेटकर आने की सलाह दी तो दुर्योधन ने श्री कृष्ण का नाम बताया। इससे गांधारी क्रोधित हो गई क्योंकि वह समझ गई कि कृष्ण ने ऐसी चाल चली है जिससे उसका पुत्र अजेय नहीं रहा है और उसकी भी मृत्यु हो जाएगी। इससे गांधारी ने श्री कृष्ण को शाप दे दिया।
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इस तरह श्री कृष्ण ने अपने देह का त्याग किया

गांधारी ने श्री कृष्ण को शाप दिया कि जिस तरह से मेरा वंश नष्ट हुआ है उसी तरह पूरे यदुवंशियों का भी अंत हो जाए। गांधारी के शाप के कारण यदुवंशी आपस में ही लड़कर नष्ट हो गए और कौरवों की तरह यदुवंश भी नष्ट हो गया।

इसके बाद एक दिन जब भगवान श्री कृष्ण वन में वृक्ष की छाया में आराम कर रहे थे। उस समय एक शिकारी वन में शिकार करने आया हुआ था। उसने जब श्री कृष्ण के पैरों की आवज सुनी तो उसे लगा कि वन में कोई हिरण है और उसने बाण चला दिया जो सीधा श्री कृष्ण के पैरों में जा लगा।

माना जाता है कि यह शिकारी पूर्व जन्म में बालि था जिसका वध भगवान श्री राम ने घात लगाकर किया। इस तरह पूर्वजन्म में किए बलि बध के कारण श्री कृष्ण को भी बालि की भांति बाणों से घायल होकर शरीर का त्याग कर दिया।
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