फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांचों पाण्डवों में सबसे ज्यादा प्यार कौन करता था द्रौपदी से?

विज्ञापन
विज्ञापन
पांचाल राज्य की राजकुमारी द्रौपदी का स्वयंवर अर्जुन ने जीता था लेकिन माता कुंती की आज्ञा के कारण द्रौपदी को पांचों पांडवों से विवाह करना पड़ा। एक नियम के अनुसार द्रौपदी हर भाई के साथ कुछ समय तक रहती थी।
विज्ञापन


जब एक भाई द्रौपदी के कक्ष में होता था तो अपने जूते को कक्ष के बाहर छोड़ देता था ताकि अन्य भाई द्रौपद के कक्ष में प्रवेश नहीं करें। एक बार जब युधिष्ठिर द्रौपदी के कक्ष में थे तब गलती से अर्जुन कक्ष में पहुंच गए क्योंकि बाहर रखा जूता कुत्ता लेकर चला गया था।

अर्जुन को इसका दंड मिला और उसे वन जाना पड़ा। अर्जुन को वन जाने से द्रौपदी को बहुत कष्ट हुआ था लेकिन द्रौपदी के सबसे बड़े प्रेमी अर्जुन नहीं थे। कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिनसे ऐसा पता चलता है कि द्रौपदी का सबसे बड़ा प्रेमी कोई था तो वह थे भीम।
विज्ञापन

तब भीम सहन नहीं कर पाए द्रौपदी का कष्ट

महाभारत में एक घटना का उल्लेख मिलता है कि दुर्योधन ने एक चाल चली जिसमें युधिष्ठिर को जुआ खेलने के लिए बुलाया गया। दुर्योधन ने छल से युधिष्ठिर को जुए में हरा दिया। दुर्योधन के उकसाने पर युधिष्ठिर ने जुए में एक-एक करके सभी भाइयों को दांव पर लगा दिया और हर गए।

अंत में युधिष्ठिर ने द्रौपदी को भी दाव पर लगाया। द्रौपदी को दांव पर लगाने पर सबसे ज्यादा क्रोधित भीम हुए थे और युधिष्ठिर का विरोध भी किया था।

फिर भी जब युधिष्ठिर द्रौपदी को जुए में हार गए और दुश्‍शासन द्रौपदी को बालों से पकड़कर सभा में लाया तो भीम अपने क्रोध पर काबू नहीं रख पाए और उसी समय प्रतिज्ञा ले ली कि दुश्शासन की छाती का लहू पीएगा। महाभारत के युद्घ में भीम ने अपनी इस प्रतिज्ञा को पूरा किया।

कामाश्क्त कीचक से द्रौपदी का बदला

जुए में हार जाने के बाद पाण्डवों को 12 साल का बनवास और 1 साल का अज्ञातवास मिला। अज्ञातवास के समय पाण्डव राजा विराट के यहां भेष बदलकर रहे। राजा विराट का साला कीचक द्रौपदी को देखकर कामाशक्त हो गया।

कीचक ने द्रौपदी को रात के समय अपने कक्ष में बुलाया। यह बात जब द्रौपदी ने भीम को बताई तो भीम ने कीचक को मृत्युदंड देने का प्रण किया और रात के समय द्रौपदी की खुद कीचक के कमरे में पहुंच गए।

द्रौपदी समझकर जैसे ही कीचक ने भीम को हाथ लगाया। भीम ने कीचक को उठाकर पटक दिया। इसके बाद दोनों के बीच युद्घ होने लगा और भीम ने कीचक का वध कर दिया।

दुर्योधन से लिया द्रौपदी के उस अपमान का बदला

भीम द्रौपदी से इतना प्रेम करते थे कि उन्हें द्रौपदी का जरा भी अपमान पसंद नहीं था। द्युत क्रीड़ा के समय जब जुए में युधिष्ठिर अपना सब कुछ हार चुके थे और द्रौपदी को दुश्शासन ने भरी सभा खींचकर लाने की हिम्मत की थी उस समय भीम क्रोध से आग बबूला हो रहे थे।

ऐसे समय में दुर्योधन ने अपनी जंघा पिटकर द्रौपदी को अपनी जंघा पर बैठने के लिए कहा था। भीम से द्रौपदी का यह अपमान सहन नहीं हुआ और इन्होंने दुर्योधन को ललकारते हुए कहा कि युद्घ में मैं तुम्हारी जंघा तोड़कर द्रौपदी के अपमान का बदला लूंगा।

महाभारत युद्घ के अंतिम चरण में जब भीम और दुर्योधन का युद्घ हुआ तब भीम ने द्रौपदी के अपना का बदला ले लिया।

द्रौपदी की मुश्किल को दूर किया भीम ने

भीम के प्रेम की दास्तान में चौथी घटना उस समय की है जब पाण्डव अपना राज पाट परीक्षित को सौंपकर स्वर्ग के लिए चले। स्वर्ग की यात्रा बड़ी ही कठिन और कष्टदायी थी। इस यात्रा में भीम ने द्रौपदी का पूरा ध्यान रखा।

यात्रा के दौरान जब पाण्डव ब्रदीनाथ पहुंचे और वहां से आगे बढ़े तो सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर नदी को पार करना द्रौपदी के लिए कठिन हो गया। ऐसे समय में भीम ने एक बड़ा सा चट्टान उठाकर नदी के बीच में डाल दिया।

द्रौपदी इस चट्टान पर चढ़कर सरस्वती नदी पार कर गई। यह चट्टान आज भी माणा गांव में सरस्वती नदी के उद्गम पर दिखता है। इसे भीम पुल कहा जाता है।
विज्ञापन

तब द्रौपदी ने कहा अगले जन्म में फिर भीम की पत्नी बनना चाहूंगी

स्वर्ग यात्रा के लिए जब पाण्डव बद्रीनाथ से आगे बढ़े तो हिमालय के बर्फीले क्षेत्र में एक एक कदम आगे बढ़ाना कठिन हो गया। पांचों पाण्डव जैसे तैसे बढ़ रहे थे और अचानक नकुल सहदेव फिसल कर खाई में गिर गए और सशरीर स्वर्ग नहीं जा सके।

जब भीम, अर्जन, युधिष्ठिर और द्रौपदी बच रह गयी तब द्रौपदी भीम का सहारा लेकर चलने लगी लेकिन द्रौपदी भी ज्यादा दूर नहीं चल पाई और वह भी गिरने लगी। ऐसे समय भीम ने द्रौपदी को संभाला।

इस समय द्रौपदी ने कहा था कि सभी भाइयो में भीम ने ही मुझे सबसे प्यार किया है और मैं अगले जन्म में फिर से भीम की पत्नी बनना चाहूंगी। इसके बाद द्रौपदी ने भी सभी का साथ छोड़ दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें