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Vastu Tips: घर के मुख्य द्वार पर क्यों लगाए जाते हैं शुभ-लाभ और स्वास्तिक जैसे निशान

Sat, 10 May 2025 05:42 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शंख और चक्र भगवान विष्णु के दो मुख्य आयुध हैं। शंख को पवित्रता और सकारात्मक ध्वनि का स्रोत माना गया है, जबकि चक्र बुराई का विनाश करने वाला प्रतीक है।
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स्वास्तिक हिंदू धर्म का अत्यंत शुभ प्रतीक है। - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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भारतीय धार्मिक परंपरा और वास्तुशास्त्र में घर के मुख्य द्वार को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह न केवल बाहरी ऊर्जा के प्रवेश का मार्ग होता है, बल्कि शुभ-अशुभ शक्तियों का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। इसी कारण प्राचीन काल से ही घर के बाहर शंख, चक्र, सीताराम, राधेश्याम, ॐ, स्वास्तिक और शुभ-लाभ जैसे दिव्य प्रतीकों को अंकित करने की परंपरा रही है। इन प्रतीकों से नकारात्मक ऊर्जा बाहर ही रुक जाती है और घर में दिव्यता, शांति व समृद्धि का संचार होता है।
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शंख और चक्र का महत्व
शंख और चक्र भगवान विष्णु के दो मुख्य आयुध हैं। शंख को पवित्रता और सकारात्मक ध्वनि का स्रोत माना गया है, जबकि चक्र बुराई का विनाश करने वाला प्रतीक है। घर के मुख्य द्वार पर इन दोनों का चित्रण एक दैवीय कवच का कार्य करता है, जिससे घर के अंदर कोई भी नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं कर सकती। शंख की ऊर्जा वातावरण को सात्विक बनाती है और चक्र अदृश्य विपत्तियों से रक्षा करता है।

सीताराम और राधेश्याम की शक्ति
"सीताराम" नाम श्रीराम और माता सीता की संयुक्त शक्ति का प्रतीक है, जबकि "राधेश्याम" श्रीकृष्ण और राधारानी की दिव्यता को दर्शाता है। इन नामों को घर के बाहर अंकित करने से वह स्थान पवित्र हो जाता है। इन नामों की उपस्थिति मात्र से ही मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान के नामों से युक्त स्थानों पर दुष्ट शक्तियाँ प्रवेश नहीं करतीं।

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ॐ का आध्यात्मिक प्रभाव
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ॐ को ब्रह्मांड की मूल ध्वनि और सभी वेदों का सार कहा गया है। यह ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक है। जब इसे घर के बाहर अंकित किया जाता है, तो यह न केवल ईश्वरीय आशीर्वाद को आकर्षित करता है, बल्कि मानसिक संतुलन, सकारात्मक विचार और आत्मिक शांति का वातावरण भी निर्मित करता है।

स्वास्तिक का धार्मिक महत्व
स्वास्तिक हिन्दू धर्म का अत्यंत शुभ प्रतीक है। यह चारों दिशाओं में फैलते कल्याण, उन्नति, समृद्धि और सुरक्षा का सूचक है। इसे घर के द्वार पर अंकित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और प्रत्येक दिशा से सकारात्मकता का प्रवेश होता है। पूजा-पाठ, व्रत या किसी नए कार्य की शुरुआत में स्वास्तिक का अंकन अनिवार्य माना जाता है।

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शुभ-लाभ का रहस्य
"शुभ" और "लाभ" वास्तव में भगवान गणेश जी के दो पुत्र माने जाते हैं। 'शुभ' मंगल कार्यों और शुभ विचारों के प्रतीक हैं जबकि 'लाभ' जीवन में आने वाले फल, सफलता और समृद्धि के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब इन्हें घर के बाहर लिखा जाता है, तो यह घर में सदैव शुभता और उन्नति को आमंत्रित करता है।
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