श्रीमद्भागवत गीता की तरह ही बहुत सी 'श्रीराम गीताओं' का उल्लेख मिलता है।
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आपने तुलसीदास कृत रामचरित मानस और वाल्मीकि कृत रामायण तो पढ़ी ही होगी और आपने श्रीमद्भागवत गीता भी पढ़ी होगी, लेकिन क्या आपने श्रीराम गीता पढ़ी है? श्रीमद्भागवत गीता की तरह ही बहुत सी 'श्रीराम गीताओं' का उल्लेख मिलता है। इन गीताओं में वेदान्त के आधार पर श्रीराम के परमब्रह्म स्वरूप का प्रतिपादन किया गया है। हमें राम गीता के नाम से गई गीताएं मिलती है।
पहली रामगीता : इस श्रीरामगीता को गुरु ज्ञानवासिष्ठ तत्वसारायण का एक भाग माना गया है। इस रामगीता में गीता की तरह ही 18 अध्याय हैं। यह रामगीता श्रीराम और हनुमान संवाद के रूप में प्रचलित हैं।
दूसरी रामगीता : श्रीराम अयोध्या लौटते हैं तो उसके बाद माता सीता को लेकर लोग तरह तरह की बातें करते हैं। अंत में श्रीराम के आदेश पर जब लक्ष्मणजी अयोध्या से माता सीता को वाल्मिकी आश्रम के वन में छोड़कर आते हैं तो वे बहुत दु:खी हो जाते हैं। उनके दु:ख को समझकर तब श्रीराम जी उन्हें सांत्वना देते हैं। श्रीराम और लक्ष्मणजी के इसी संवाद को या कहें कि श्रीराम के इन्हीं प्रवचनों को राम गीता कहा गया।
तीसरी रामगीता : ब्रह्मांड पुराण के उत्तरखंड में अध्यात्म रामायण है। इस अध्यात्म रामायण के पांचवें सर्ग में भी श्रीराम गीता के नाम से एक गीता का उल्लेख है। इसमें कुल 62 श्लोक बताए जाते हैं। लक्ष्मणजी के आग्रह पर इसे श्री रामजी ने उन्हें सुनाया था। इसमें कर्म की प्रवृत्ति और निवृत्ति की विवेचना की गई है।
चौथी रामगीता : स्कन्दपुराण के निर्वाणखंड में हमें 'रामगीता सटीका' पढ़ने को मिलती है। यह स्कंद पुराण का ही एक अंश है। इसके तीन अध्यायों में श्री राम के परब्रह्म स्वरूप का प्रतिपादन किया गया है।